FAO की बड़ी चेतावनी, अगले 6 से 12 महीनों में आसमान छू सकते हैं खाने-पीने की चीजों के दाम

FAO की बड़ी चेतावनी, अगले 6 से 12 महीनों में आसमान छू सकते हैं खाने-पीने की चीजों के दाम

मिडिल ईस्ट में तनाव और होर्मुज रास्ते में रुकावट की वजह से दुनिया पर बड़ा खाद्य संकट मंडरा रहा है. FAO ने चेतावनी दी है कि अगले 6 से 12 महीनों में खाने-पीने की चीजें बहुत महंगी हो सकती हैं, जिससे भुखमरी फैल सकती है. डीजल-पेट्रोल महंगा होने से खाद के दाम बढ़ेंगे, जिससे फसलों की पैदावार घटेगी और महंगाई और बढ़ेगी. इससे निपटने के लिए सरकारों को वैकल्पिक समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करना होगा, अनाज के एक्सपोर्ट पर रोक नहीं लगानी होगी और किसानों को सस्ता लोन व डिजिटल मदद देनी होगी. साथ ही, खेती में सोलर पावर और नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना होगा ताकि भविष्य में ऐसे संकट से बचा जा सके.

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FAO की बड़ी चेतावनी, अगले 6 से 12 महीनों में आसमान छू सकते हैं खाने-पीने की चीजों के दामपश्चिम एशिया युद्ध से महंगाई बढ़ने के आसार (AI Image)

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते में पैदा हुई रुकावटों के कारण आज पूरी दुनिया के सामने एक बहुत बड़ा और गंभीर खाद्य संकट खड़ा हो गया है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इसे जहाजों की आवाजाही में होने वाली कोई मामूली या अस्थाई रुकावट समझने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. दरअसल, यह एक ऐसे विनाशकारी वैश्विक आर्थिक झटके की शुरुआत है, जो अगले 6 से 12 महीनों के भीतर पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजों की कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकता है और एक भीषण भुखमरी का माहौल पैदा कर सकता है. 

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो का साफ कहना है कि अब वह समय आ चुका है जब दुनिया के तमाम देशों, सरकारों, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और प्राइवेट सेक्टर को अपनी नींद से जागना होगा. उन्हें आपस में मिलकर इस गंभीर झटके को झेलने और इससे निपटने की क्षमता को तेजी से बढ़ाना होगा. अगर समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इस संकट का सबसे बुरा और सीधा असर गरीब देशों, छोटे किसानों और समाज के सबसे कमजोर पिछड़े परिवारों पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर हाहाकार मच सकता  है.     

खेती-किसानी पर संकट का दौर

इस संकट का असर केवल जहाजों के रुकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक चेन की तरह काम कर रहा है. सबसे पहले पेट्रोल-डीजल महंगा हो रहा है, जिससे फर्टिलाइजर और बीजों की कीमतें बढ़ रही हैं. जब खाद महंगी होगी, तो किसान उसका इस्तेमाल कम करेंगे, जिससे फसलों की पैदावार घट जाएगी. पैदावार घटने से बाजारों में अनाज कम आएगा और महंगाई तेजी से बढ़ेगी. हाल ही में अप्रैल के महीने में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक (Food Price Index) लगातार तीसरे महीने बढ़ा है, जिसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट का तनाव और ट्रांसपोर्ट का महंगा होना है. ऊपर से इस साल 'अल नीनो' मौसम के कारण सूखा पड़ने की भी आशंका है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं.

किसानों को सीधी मदद मिले

FAO के विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से बचने के लिए हमारे पास समय बहुत कम है. सबसे पहले, होर्मुज के रास्ते को छोड़कर सऊदी अरब और लाल सागर जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल तुरंत शुरू करना होगा. इसके अलावा, बड़े देशों को अनाज और खाद के निर्यात पर कोई पाबंदी नहीं लगानी चाहिए ताकि जरूरतमंद देशों को खाना मिलता रहे. इस समय सरकारों को गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और डिजिटल माध्यमों से सीधे पैसे भेजने की व्यवस्था शुरू करनी चाहिए. किसानों को सलाह दी गई है कि वे ऐसी तकनीक अपनाएं जिसमें खाद कम लगे, जैसे एक साथ अनाज और दालें उगाना, जिससे मिट्टी को प्राकृतिक रूप से पोषण मिले.

किसानों मिले सस्ता कर्ज और डिजिटल पेमेंट

अगले कुछ महीनों के लिए सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी होंगी जिससे खेती का काम न रुके. किसानों, छोटे व्यापारियों और कृषि उद्योगों को बहुत कम ब्याज पर आपातकालीन कर्ज दिया जाना चाहिए, जिसे चुकाने की अवधि फसल कटने के समय से जुड़ी हो और उन्हें 6 से 9 महीने की छूट मिले. मोजाम्बिक और पेरू जैसे देशों की तरह भारत और अन्य देशों को भी डिजिटल किसान रजिस्ट्री और मोबाइल मनी का उपयोग करना चाहिए ताकि मदद सीधे और तेजी से पहुंचे. साथ ही, संकट के समय अनाज से इथेनॉल आदि बनाने पर रोक लगानी चाहिए ताकि गाड़ियों के ईंधन के चक्कर में इंसानों का निवाला न छिने.

सौर ऊर्जा और आधुनिक तकनीक पर जोर

FAO के विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में इस तरह के संकटों से बचने के लिए दुनिया को अपनी पूरी व्यवस्था बदलनी होगी. हमें केवल एक समुद्री रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय बंदरगाहों और गोदामों का एक बड़ा नेटवर्क बनाना होगा, खेती में डीजल के इंजनों को हटाकर सौर ऊर्जा (Solar Power) और बिजली से चलने वाले पंप लगाने होंगे, ड्रोन, मिट्टी की जांच और सटीक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना होगा ताकि खाद की बर्बादी रुके और कम लागत में ज्यादा पैदावार हो. अगर सरकारें और अंतरराष्ट्रीय बैंक आज मिलकर सही फैसले लेंगे, तभी भविष्य में आने वाले ऐसे किसी भी बड़े खाद्य संकट से दुनिया को बचाया जा सकेगा.

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