बिहार के मखाने की विदेशों में बढ़ी मांग, ग्रीस के लिए पहली खेप रवाना

बिहार के मखाने की विदेशों में बढ़ी मांग, ग्रीस के लिए पहली खेप रवाना

बिहार के मशहूर मखाने ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान बनाई है. बिहार से मखाने की पहली व्यावसायिक खेप ग्रीस के लिए रवाना की गई है. इससे मखाना किसानों और कारोबारियों के लिए विदेशों में नए बाजार खुलने की उम्मीद है.

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बिहार के मखाने की विदेशों में बढ़ी मांग, ग्रीस के लिए पहली खेप रवानामखाने की विदेशों में बढ़ी मांग (Photo: ITG)

बिहार के खेतों से निकलकर मखाना अब विश्व के अलग-अलग देशों तक अपनी पहुंच बनाना शुरू कर दिया है. बीते महीनों में मखाना कई देशों तक भेजा गया है. वहीं, अब बिहार के कृषि इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की पहली व्यावसायिक खेप को कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ऑनलाइन माध्यम से पूर्णिया से ग्रीस (यूरोप) के लिए रवाना किया. मिथिला मखाना की यह पहली व्यावसायिक खेप बिहार के मखाना किसानों, एफपीओ, निर्यातकों और राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.

मखाना किसानों की मेहनत और सामर्थ्य की पहचान

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना बिहार की सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ हमारे किसानों की मेहनत और सामर्थ्य की पहचान है. आज बिहार के खेतों और तालाबों से निकलकर मिथिला मखाना यूरोप के बाजार तक पहुंच रहा है. यह बिहार के कृषि उत्पादों की दुनियाभर में इसकी बढ़ती मान्यता का प्रमाण है. उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह को निर्देश दिया कि मखाना की खेती को आधुनिक, आसान और अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विशेष रूप से शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए.

मखाना की विदेशों में मांग, डॉलर में हो रही कमाई

कृषि मंत्री सिन्हा ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,200 मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना और उससे बने उत्पाद 20 से अधिक देशों को निर्यात किए, जिससे लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई हुई. अमेरिका, मध्य-पूर्व और अफ्रीका सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है. आगे उन्होंने कहा कि इस वर्ष जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की खेप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अब ग्रीस तक पहुंची है. पहली बार बिहटा के बियाडा औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई थी.

मखाना का उचित मूल्य दिलाना जरूरी

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड बनाया गया है। यह बोर्ड मखाना किसानों को नई तकनीक, प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग, बेहतर कीमत और बाजार से जोड़ने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य केवल मखाना का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और बिहार के मखाना को दुनिया के बाजार में मजबूत पहचान दिलाना है. ग्रीस के लिए रवाना हुई यह पहली व्यावसायिक खेप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. सरकार द्वारा कृषि निर्यात नीति का निर्माण किया जा रहा है. इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों, एफपीओ और उद्यमियों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध कराना है.

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