दिल्ली में पहली बार महिला किसानों का महाकुंभ, 30 सितंबर को जुटेंगी 7 हजार महिलाएं

दिल्ली में पहली बार महिला किसानों का महाकुंभ, 30 सितंबर को जुटेंगी 7 हजार महिलाएं

दिल्ली में 30 सितंबर को पहली बार अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित होगा. इसमें देशभर से करीब 7 हजार महिला किसान और पदाधिकारी शामिल होंगी. सम्मेलन में खेती में महिलाओं के योगदान, कृषि नीति में उनकी भागीदारी, प्राकृतिक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. इस दौरान कई महिला किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा.

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दिल्ली में पहली बार महिला किसानों का महाकुंभ, 30 सितंबर को जुटेंगी 7 हजार महिलाएंपहली बार महिला किसानों का बड़ा सम्मेलन (सांकेतिक फोटो)

नई दिल्ली में भारतीय किसान संघ (BKS) पहली बार महिला किसानों के लिए बड़ा सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है. यह अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन 30 सितंबर को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होगा. इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 7 हजार महिला किसान और संगठन की महिला पदाधिकारी शामिल होंगी. सम्मेलन में खेती में महिलाओं की भूमिका और कृषि से जुड़े फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा होगी. भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि महिलाएं खेती, पशुपालन और मछली पालन में बड़ी भूमिका निभाती हैं.

इसके बावजूद जब खेती और किसानों से जुड़ी नीतियां बनाई जाती हैं, तो महिलाओं की भागीदारी उतनी दिखाई नहीं देती. उन्होंने कहा कि महिला किसान खेती के कई जरूरी काम संभालती हैं, लेकिन नीति बनाने की प्रक्रिया में उनकी आवाज को पर्याप्त जगह नहीं मिलती. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य इसी स्थिति पर चर्चा करना और महिलाओं की कृषि नीति में भागीदारी बढ़ाने की मांग को सामने रखना है.

खेती के 60 से 80 फीसदी काम करती हैं महिलाएं

भारतीय किसान संघ के मुताबिक, खेती में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. महिलाएं बुवाई, रोपाई, कटाई, निराई-गुड़ाई जैसे कई काम करती हैं. इसके साथ ही वे पशुपालन और दूसरे कृषि से जुड़े काम भी संभालती हैं. संगठन का कहना है कि कई इलाकों में महिलाएं खेती के काम का 60 से 80 फीसदी हिस्सा संभालती हैं. इसके बावजूद उन्हें अक्सर किसान के रूप में वह पहचान नहीं मिलती, जिसकी वे हकदार हैं. सम्मेलन में महिला किसानों के इसी योगदान को सामने लाने की कोशिश की जाएगी.

देशभर से आएंगी करीब 7 हजार महिला किसान

30 सितंबर को होने वाले सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 7 हजार महिला किसान और महिला पदाधिकारी पहुंचेंगी. भारतीय किसान संघ का कहना है कि यह पहली बार है जब संगठन इतने बड़े स्तर पर सिर्फ महिला किसानों को केंद्र में रखकर कार्यक्रम कर रहा है. इस कार्यक्रम में महिला किसानों के खेती से जुड़े अनुभव, उनकी समस्याएं और कृषि क्षेत्र में उनके काम पर चर्चा होगी. साथ ही महिलाओं को कृषि नीति से जुड़े फैसलों में अपनी बात रखने के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

प्राकृतिक खेती और बीज संरक्षण पर भी होगी चर्चा

सम्मेलन में केवल महिला किसानों की भागीदारी ही मुद्दा नहीं होगी. इसमें प्राकृतिक और जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन, रोजगार बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण जैसे विषयों पर भी बात होगी. भारतीय किसान संघ का कहना है कि महिलाएं पारंपरिक खेती से जुड़ी जानकारी को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. स्थानीय बीजों को बचाने और कृषि जैव विविधता को बनाए रखने में भी उनका योगदान है.

महिला किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर

भारतीय किसान संघ कृषि से जुड़ी सरकारी योजनाओं में महिलाओं की पहुंच का मुद्दा भी उठाएगा. संगठन का कहना है कि महिला किसानों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में कई बार परेशानी होती है. सम्मेलन में महिला किसानों की सरकारी योजनाओं तक पहुंच और कृषि नीति बनाने वाली संस्थाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा की जाएगी. संगठन चाहता है कि कृषि से जुड़े फैसलों में महिला किसानों की आवाज भी मजबूती से शामिल हो.

सफल महिला किसानों को किया जाएगा सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से चुनी गई महिला किसानों को उनके काम के लिए सम्मानित भी किया जाएगा. इनमें गाय आधारित खेती और कारोबार, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन, रोजगार बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं शामिल होंगी. संगठन का कहना है कि इन महिलाओं के काम को सामने लाने से दूसरी महिला किसानों को भी खेती और उससे जुड़े कामों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी.

गाय आधारित खेती और प्राकृतिक खेती पर भी फोकस

भारतीय किसान संघ ने बताया कि महिलाएं उसके ‘गौ कृषि वाणिज्यम’ यानी गाय आधारित खेती और कारोबार के विचार को आगे बढ़ाने में भी भूमिका निभा रही हैं. इसके साथ ही महिलाएं रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक और कम रसायन वाली खेती को बढ़ावा देने में भी काम कर रही हैं. संगठन का कहना है कि महिलाओं के जरिए पारंपरिक खेती, स्थानीय बीज और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की कोशिशों को आगे बढ़ाया जा सकता है.

महिलाओं को किसान के रूप में पहचान दिलाने की कोशिश

भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय महिला समन्वयक मंजू दीक्षित ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य महिला किसानों में आत्मविश्वास बढ़ाना है. साथ ही उन्हें उन नीतिगत फैसलों में हिस्सा लेने के लिए आगे लाना है, जिनका सीधा असर खेती और ग्रामीण जीवन पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के जरिए महिलाओं की किसान के रूप में पहचान और सम्मान को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी. इसके साथ ही खेती के दौरान महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं को भी सामने रखा जाएगा.

2026 को महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने की पृष्ठभूमि

यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ द वुमन फार्मर यानी अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में घोषित किया है. इसी पृष्ठभूमि में महिला किसानों की भूमिका और उनकी समस्याओं पर दुनिया भर में चर्चा हो रही है. भारतीय किसान संघ का यह सम्मेलन भी इसी विषय को आगे बढ़ाते हुए कृषि में महिलाओं के योगदान, उनकी पहचान और कृषि नीति में उनकी भागीदारी को प्रमुखता देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. (PTI)

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