केंद्र की कृषि योजनाओं में लापरवाही बरतने पर शिवराज ने दी हिदायत, बोले- राज्‍यों के CM से करूंगा बात

केंद्र की कृषि योजनाओं में लापरवाही बरतने पर शिवराज ने दी हिदायत, बोले- राज्‍यों के CM से करूंगा बात

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय की मासिक समीक्षा बैठक में सुस्त राज्यों और जिलों को सख्त हिदायत दी. उन्होंने कहा कि किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में लापरवाही स्वीकार नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्रियों से सीधे बात करेंगे.

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केंद्र की कृषि योजनाओं में लापरवाही बरतने पर शिवराज ने दी हिदायत, बोले- राज्‍यों के CM से करूंगा बातकेंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्‍ली में समीक्षा बैठक की अध्‍यक्षता की

केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक में योजनाओं की धीमी रफ्तार को लेकर अधिकारियों और राज्यों को सख्त हिदायत दी. उन्होंने कहा कि जो जिले लगातार पीछे हैं या योजनाओं को चलाने में सुस्ती बरत रहे हैं, वहां यह स्थिति मंजूर नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर वह संबंधित मुख्यमंत्रियों से सीधे बात करेंगे, ताकि किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने में कोई रुकावट न रहे. कृषि भवन, नई दिल्ली में हुई बैठक की अध्यक्षता शिवराज सिंह चौहान ने की. इसमें कृषि सचिव अतीश चंद्रा समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. 

हर महीने होगी योजनाओं की समीक्षा

कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि मंत्रालय के सभी विभागों, प्रभागों और राष्ट्रीय मिशनों के कामकाज की हर महीने समीक्षा होगी. अधिकारियों के लिए वित्तीय और भौतिक लक्ष्य तय किए जाएंगे और उनकी प्रगति की नियमित निगरानी होगी. मंत्री ने वित्तीय अनुशासन पर भी जोर दिया और कहा कि योजनाओं का खर्च वित्तीय वर्ष के आखिरी महीनों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.

बैठक में मिट्टी की सेहत, पराली और फसल अवशेष प्रबंधन के साथ रासायनिक खादों के असंतुलित इस्तेमाल से खेतों को बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया. यह अभियान 22 अक्टूबर से शुरू होगा. चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसकी तैयारी और जमीनी क्रियान्वयन मजबूत होना चाहिए, ताकि किसानों को इसका अधिकतम लाभ मिले.

अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक और मैदानी अमला सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेगा. किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक तत्वों के संरक्षण, पराली न जलाने और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी.

पीएम-किसान और फसल बीमा में पारदर्शिता पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने पीएम-किसान में सभी पात्र किसानों को जोड़ने और अपात्र लाभार्थियों को सूची से बाहर करने के निर्देश दिए. उन्होंने पीएम-आशा के तहत वास्तविक खरीद का हर महीने आकलन करने को कहा. खरीद की निर्धारित तीन महीने की अवधि खत्म होने के बाद बार-बार समय बढ़ाने की व्यवस्था पर रोक लगाने और खरीद में लीकेज खत्म करने की हिदायत दी.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उन्होंने क्लेम सेटलमेंट में पारदर्शिता रखने और किसी भी दावे को बेवजह लंबित नहीं रखने को कहा. किसानों की शिकायतों का तय समय में निपटारा करने के भी निर्देश दिए गए. चालू खरीफ में फसल बीमा योजना के तहत किसानों का नामांकन पिछले खरीफ के 2.30 करोड़ से बढ़कर 2.83 करोड़ हो गया है. इसमें 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बीमित क्षेत्र 2.97 करोड़ हेक्टेयर और बीमित राशि 1.86 लाख करोड़ रुपये हो गई है. 

10.77 करोड़ किसानों की बनी फार्मर आईडी

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की समीक्षा में बताया गया कि देश में 14 करोड़ किसानों के डिजिटल एकीकरण के लक्ष्य के मुकाबले 10.77 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है. चौहान ने धीमी रफ्तार वाले राज्यों में विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र किसान डिजिटल व्यवस्था से जुड़ सकें.

चालू खरीफ सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का सर्वे पूरा हो चुका है. राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के तहत 8.03 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का डिजिटल नक्शा भी पूरा किया जा चुका है.

दलहन और तिलहन उत्पादन लक्ष्य से आगे

राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत 2025-26 में दलहन उत्पादन 266 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 274.09 लाख टन रहा. दलहन की बुआई का रकबा भी 283 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर पहुंच गया.

खाद्य तेल-तिलहन मिशन के तहत 2025-26 में 427 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 430.59 लाख टन तिलहन उत्पादन हुआ. तिलहन का रकबा 308.86 लाख हेक्टेयर रहा. घरेलू खाद्य तेल उत्पादन 2023-24 के 121.75 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 129.96 लाख टन हो गया.

प्राकृतिक खेती में बढ़ा कवरेज

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 2025-26 में 18.75 लाख किसानों के लक्ष्य के मुकाबले 20.93 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े. इस दौरान 7.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र इसके दायरे में आया. अब तक कुल 27.32 लाख किसान और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती से जुड़ चुका है. मिशन के तहत 33,257 से अधिक कृषि सखियों और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स को तैनात किया गया है.

FPO और ग्रामीण ढांचे पर भी समीक्षा

10,000 FPO योजना के तहत 30.11 लाख किसान FPO से जुड़े हैं. योजना में 2.40 लाख अतिरिक्त किसानों को जोड़ने का लक्ष्य था. FPO का औसत सालाना टर्नओवर 38 लाख रुपये से बढ़कर 141.76 लाख रुपये हो गया है.

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 2026-27 में अब तक 664 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इनमें 314 प्रयोगशालाएं, गोदाम और कस्टम हायरिंग सेंटर से जुड़ी परियोजनाएं और 303 बीज उत्पादन व रकबा विस्तार की परियोजनाएं शामिल हैं. कुल 8,550 करोड़ रुपये के आवंटन में से 3,151.80 करोड़ रुपये की प्रगति दर्ज की गई है.

कृषि अवसंरचना कोष के तहत 2.25 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए 1,01,502 करोड़ रुपये से अधिक के लोन मंजूर किए गए हैं. इन परियोजनाओं से वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और कस्टम हायरिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं.

KVK, आत्मा और कृषि विश्वविद्यालय मिलकर करेंगे काम

कृषि तकनीक को किसानों तक तेजी से पहुंचाने के लिए चौहान ने कृषि विज्ञान केंद्र, एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को एक टीम के तौर पर काम करने के निर्देश दिए. उनका जोर कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच की दूरी कम करने पर रहा.

उन्होंने किसान मेलों को भी ज्यादा उपयोगी और सहभागी बनाने के निर्देश दिए. मखाना विकास योजना की समीक्षा में किसानों को उपज का तीन गुना तक अधिक मूल्य मिलने की जानकारी दी गई. चौहान ने मखाना ट्रेनिंग की गुणवत्ता की जमीनी जांच करने को कहा.

नीचे रहने वाले जिलों पर होगी सीधी निगरानी

प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के तहत 74 आउटपुट इंडिकेटर्स पर आधारित जिला रैंकिंग की भी समीक्षा हुई. देश का औसत स्कोर अप्रैल के 18.85 से बढ़कर अगस्त में 46.89 हो गया. बैठक में लगातार निचले पायदान पर रहने वाले जिलों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया.

चौहान ने अधिकारियों को ऐसे जिलों और राज्यों के कृषि मंत्रियों को स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह मुख्यमंत्रियों से सीधे बात करेंगे. साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय फील्ड विजिट करने और योजनाओं के असर का जमीनी स्तर पर आकलन करने को कहा गया.

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