स्ट्रॉबेरी एक ऐसा फल है जिससे हम भली भांति परिचित हैं. ये लाल रंग के दिल के आकार का एक बहुत ही नाजुक फल है. इस फल का स्वाद खट्टा-मीठा होता है. यह लोगों का बहुत ही पसंदीदा फल है. इसके अलावा स्ट्रॉबेरी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए काफी जरूरी है. लोगों के बीच स्ट्रॉबेरी की बढ़ती हुई मांग की वजह से किसानों की रुचि स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर तेजी से बढ़ने लगी है. ऐसे में आपको जानना जरूरी है कि भारत में स्ट्रॉबेरी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन सा है. यानी किस राज्य से सबसे अधिक आता है स्ट्रॉबेरी. इसके लिए पढ़ें ये रिपोर्ट-
स्ट्रॉबेरी उत्पादन के मामले में, महाराष्ट्र देश के अन्य सभी राज्यों में सबसे आगे है. क्योंकि यहां की मिट्टी और जलवायु स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए बेस्ट है. वहीं, नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल उत्पादित होने वाले स्ट्रॉबेरी उत्पादन में महाराष्ट्र अकेले 50.83 फीसदी का उत्पादन करता है.
स्ट्रॉबेरी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र जहां सबसे आगे है. तो वहीं उसके बाद दूसरे स्थान पर हरियाणा है. यहां के किसान अधिक मात्रा में स्ट्रॉबेरी उगाते है. यहां कुल 24.92 फीसदी स्ट्रॉबेरी का उत्पादन किया जाता है. वहीं, इसके उत्पादन में तीसरे पायदान पर झारखंड है. यहां स्ट्रॉबेरी का 6.68 फीसदी उत्पादन किया जाता है. इसके अलावा चौथे पायदान पर मिजोरम है. इस राज्य का स्ट्रॉबेरी उत्पादन में 5.12 फीसदी की हिस्सेदारी है. साथ ही पांचवें नंबर पर मेघालय है जहां स्ट्रॉबेरी की 4.26 फीसदी पैदावार होती है. वहीं, छठे पायदान पर मध्य प्रदेश है. यहां स्ट्रॉबेरी का 2.98 फीसदी उत्पादन किया जाता है. यानी ये छह राज्य मिलकर कुल लगभग 95 फीसदी स्ट्रॉबेरी का उत्पादन करते हैं.
स्वास्थ्य के लिहाज से स्ट्रॉबेरी का खाना बहुत लाभकारी माना जाता है. यह फल विटामिन C और विटामिन A और K का काफी अच्छा स्रोत है. चिकित्सकों के अनुसार यह फल चेहरे में कील मुंहासे, आंखों की रोशनी चमक के साथ दांतों की चमक बढ़ाने के काम आता है. इनके आलवा इसमें केल्सियम मैग्नीशियम फोलिक एसिड फास्फोरस पोटेशियम पाया जाता है. इसी वजह से स्ट्रॉबेरी के फल बाजार में महंगी कीमतों पर बिकते हैं.
स्ट्रॉबेरी की बुवाई सितंबर से अक्टूबर महीने में करना चाहिए. स्ट्रॉबेरी की खेती करने के लिए खेत को बुवाई से एक सप्ताह पहले 3 से 4 बार अच्छी से जुताई करें. इसके बाद 75 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर की दर से खेत मे अच्छे तरीके से मिलाए. वहीं, फसल को कीट और रोग से बचाने के लिए खेत में पोटाश और फास्फोरस भी मिट्टी परीक्षण के आधार पर मिलाए. इसके बाद तैयार खेत में 25 से 30 सेंटीमीटर की ऊंची क्यारियां बनाएं और स्ट्रॉबेरी की बुवाई करें.
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