पंजाब सरकार ने बढ़ाया दूध खरीदी का रेट (सांकेतिक तस्वीर)पंजाब सरकार ने गुरुवार को दूध खरीदी की दरों में बढ़ोतरी की जानकारी दी है. इस फैसले से डेयरी से जुड़े किसानों की आमदनी में इजाफा होगा. नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हैं और खरीद कीमत में 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम फैट तक बढ़ोतरी की गई है. राज्य सरकार के इस फैसले से मिल्कफेड पंजाब (वेरका) के नेटवर्क से जुड़े करीब 2.5 लाख डेयरी किसानों को इस फैसले का सीधा फायदा मिलेगा. वहीं, व्यापक स्तर पर यह असर लगभग 30 लाख दूध उत्पादकों तक पहुंच सकता है, क्योंकि बाजार में अन्य एजेंसियां और निजी खरीदार भी कीमतों में बदलाव कर सकते हैं.
राज्य सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि खरीद दर बढ़ने से डेयरी कारोबार की लागत और आय के बीच संतुलन बेहतर होने की उम्मीद है. खासकर उन किसानों के लिए राहत मानी जा रही है जो बढ़ती लागत के बीच स्थिर दाम मिलने से दबाव में थे. इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा.
बाजार में दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि बड़ी खरीद एजेंसी के दाम बढ़ने के बाद निजी कंपनियां भी अपने रेट संशोधित कर सकती हैं. राज्य के डेयरी सेक्टर में कैश फ्लो बढ़ने की संभावना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिल सकता है.
इससे पहले नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के कई शहरों में दूध की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. गर्मी के मौसम में चारे की कमी और पशु आहार महंगा होने के कारण दूध के दाम 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं. इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, भोपाल और जबलपुर समेत कई शहरों में यह बढ़ोतरी लागू हो चुकी है. स्थानीय स्तर पर लागत और सप्लाई की स्थिति के अनुसार अलग-अलग जगहों पर दाम तय किए गए हैं.
इंदौर में खुला दूध, जो पहले 60 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, अब 63 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. अन्य शहरों में भी इसी तरह कीमतों में संशोधन किया गया है. दूध विक्रेताओं का कहना है कि गर्मियों में हरे चारे की उपलब्धता कम हो जाती है और पशु आहार महंगा हो जाता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है.
साथ ही, इस मौसम में पशुओं की दूध देने की क्षमता भी स्वाभाविक रूप से घटती है, जिससे सप्लाई पर दबाव पड़ता है. इन परिस्थितियों के चलते कीमतों में यह बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर पड़ रहा है. आने वाले महीनों में मौसम और लागत के आधार पर कीमतों में और बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. (पीटीआई)
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