रायपुर में सहकारिता मंत्रालय की कार्यशाला का हुआ आयोजनछत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार को सहकारिता मंत्रालय की ओर से क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें देश में नई सहकारी समितियों के गठन, डेयरी सेक्टर के विस्तार और अन्न भंडारण योजना की प्रगति की समीक्षा की गई. इस कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के अधिकारी शामिल हुए. साथ ही नाबार्ड, एफसीआई, नेफेड, एनसीसीएफ और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया.
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारी क्षेत्र गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि डेयरी सेक्टर ने गुजरात जैसे राज्यों में महिलाओं की आय बढ़ाने, पोषण सुधारने और गांवों में आर्थिक मजबूती लाने का काम किया है. उन्होंने पूर्वी और मध्य भारत के राज्यों में डेयरी सेक्टर की बड़ी संभावनाओं की भी बात कही.
कार्यशाला में श्वेत क्रांति 2.0 (व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0) की प्रगति की समीक्षा की गई. मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में 75 हजार नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने और 46 हजार पुरानी समितियों को मजबूत करने के लक्ष्य पर चर्चा की. अधिकारियों ने कहा कि डेयरी सेक्टर को सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि बायोगैस, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर, व्हे प्रोटीन और कार्बन क्रेडिट जैसे क्षेत्रों में भी काम बढ़ाया जाएगा, ताकि किसानों को अतिरिक्त आय मिल सके.
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि डेयरी सहकारी समितियां गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही हैं. समितियों से जुड़ने के बाद महिलाएं सिर्फ गृहिणी तक सीमित नहीं रह रहीं, बल्कि छोटे उद्यमी के रूप में भी आगे आ रही हैं. इससे उन्हें बाजार, बैंकिंग सेवाओं और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं. अधिकारियों ने कहा कि इससे गांवों का वित्तीय सिस्टम भी मजबूत हो रहा है.
कार्यशाला में ऊर्जा संकट और बढ़ती लागत के बीच सस्टेनेबल और सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पर भी चर्चा हुई. मंत्रालय ने कहा कि कंप्रेस्ड बायोगैस, गोबरधन योजना, ऑर्गेनिक खाद और बायो-एनर्जी जैसे मॉडल गांवों में नई कमाई का जरिया बन सकते हैं. इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी.
कार्यक्रम में दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की प्रगति पर भी मंथन हुआ. अधिकारियों ने पैक्स को मजबूत करने, वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और भंडारण क्षमता सुधारने की रणनीतियों पर चर्चा की. साथ ही मल्टीपर्पज पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के गठन और निष्क्रिय समितियों को दोबारा सक्रिय करने के उपायों पर भी विचार किया गया.
छत्तीसगढ़ सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने कहा कि राज्य सरकार डेयरी विकास, बायोगैस प्रोजेक्ट और अन्न भंडारण सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है. उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए सहकारिता मंत्रालय का आभार भी जताया.
समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि सहकारी योजनाओं को मिशन मोड में लागू करने की जरूरत है. इसके लिए राज्यों और सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल, नियमित समीक्षा और अनुभव साझा करने पर जोर दिया गया. अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती स्तर की दिक्कतों को समय रहते दूर करने से योजनाओं का लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेगा.
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