Ice प्लांट से बदली किस्तमजहां चाह होती है, वहां राह मिल ही जाती है. इस कहावत को मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की रहने वाली पूनम गोस्वामी ने सच कर दिखाया है. उन्होंने न केवल बाजार की जरूरत को पहचाना है, बल्कि सरकारी मदद से मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग का सबसे बड़ा आइस प्लांट स्थापित कर एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई है. आज पूनम इस आईस प्लांट के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये की शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं.
शुरुआत में पूनम गोस्वामी ने कुछ नया करने के इरादे से ग्वालियर जिले के बाजारों का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने पाया कि डबरा, टेकनपुर, पिछोर और ग्वालियर के मछली बाजारों में बर्फ की भारी मांग है. मछली को ताजा रखने के लिए मछुआरों और व्यापारियों को कोल्ड स्टोरों पर निर्भर रहना पड़ता था. इसी जरूरत को देखते हुए उन्होंने आइस प्लांट लगाने का फैसला किया, और आज इस बिजनेस में वो सफल हैं.
पूनम के सामने सबसे बड़ी चुनौती 80 लाख रुपये की भारी लागत थी. पैसों की कमी के कारण उनका सपना टूटता नजर आ रहा था, तभी उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) की जानकारी मिली. तब उन्होंने इस योजना के तहत 80 लाख रुपये का लोन लिया. इसके साथ ही उन्हें 48 लाख रुपये यानी 60 फीसदी सब्सिडी मिला. इससे उन्होंने अपना आईस प्लांट लगाया और उसकी सप्लाई पूरे जिले में कर रही हैं.
ग्वालियर संभाग में 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता वाला यह एकमात्र और सबसे बड़ा आइस प्लांट है. पूनम बताती हैं कि अब उन्हें मांग के लिए बाजार नहीं खोजना पड़ता, बल्कि उनके पास पहले से ही एडवांस ऑर्डर रहते हैं. उनके इस कदम से स्थानीय मछली पालन से जुड़े लोगों को भी समय पर और सस्ती बर्फ उपलब्ध हो रही है. वहीं, इससे पूनम की हर महीने 1 लाख रुपये की आय हो रही है.
मछली पालकों के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना केंद्र सरकार की एक खास योजना है. इस योजना के जरिए मछली पालकों को बिना गारंटी के 2 लाख रुपये तक का लोन 7 प्रतिशत के ब्याज दर पर दिया जाता है. इस योजना की शुरुआत सितंबर 2020 में की गई थी. इस योजना के जरिए किसानों को मछली पालन के लिए लोन और फ्री ट्रेनिंग भी दी जाती है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सामान्य श्रेणी के लोगों को व्यवसाय में आ रही लागत का 40 फीसदी तक लाभ दिया जाता है. तो वहीं जो महिलाएं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखती हैं, उन्हें 60 फीसदी तक सब्सिडी दिया जाता है.
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