प्याज के दाम गिरेनासिक जिले की लासलगांव एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) में पिछले 8-10 दिनों में थोक प्याज की औसत कीमतें लगभग 25% गिर गई हैं, क्योंकि बाजार में प्याज की आवक बढ़ गई है. जो कीमतें एक हफ्ते पहले लगभग 1,500 रुपये प्रति क्विंटल थीं, वे अब गिरकर लगभग 1,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं.
APMC के एक अधिकारी ने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को बताया, "ताजा प्याज के स्टॉक की आवक काफी बढ़ गई है, जो पहले लगभग 15,000 क्विंटल प्रतिदिन थी, वह अब 25,000 से 30,000 क्विंटल हो गई है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है."
अभी बाजार में जो प्याज आ रहा है, वह देर से बोई गई खरीफ की फसल का है. पिछले साल लगातार बारिश के कारण इन फसलों की बुवाई में एक महीने से ज्यादा की देरी हुई थी. गर्मी के मौसम में होने वाले प्याज के उलट, देर से बोए गए खरीफ प्याज की शेल्फ लाइफ एक महीने से कम होती है और वे जल्द ही सड़ने लगते हैं. इसलिए, किसानों को उन्हें मौजूदा बाजार कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे ओवरसप्लाई होती है और थोक कीमतों में गिरावट आती है, व्यापारियों ने कहा.
गुरुवार को, लासलगांव APMC में औसत थोक कीमत 1,100 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई, जिसमें कीमतें 500 रुपये से 1,356 रुपये प्रति क्विंटल के बीच थीं. दिन भर में कुल 26,392 क्विंटल प्याज की नीलामी हुई. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने एक रिपोर्ट में जानकारी दी.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज उगाने की लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है. उन्होंने कहा, "जब कीमतें इस स्तर से नीचे गिरती हैं तो किसानों को वित्तीय नुकसान होता है."
मौजूदा कीमतें उत्पादन लागत से काफी कम होने के कारण, संघ ने राज्य सरकार से उन किसानों को 500 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान देने का आग्रह किया है, जिन्हें पिछले कुछ महीनों में अपना उत्पाद नुकसान में बेचना पड़ा है.
मौजूदा कीमतों को लेकर पूरे महाराष्ट्र के किसानों में रोष है. इस गिरावट के लिए किसान सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बता रहे हैं, खासकर एक्सपोर्ट पॉलिसी को. किसानों का कहना है कि सरकार स्थिति को समझे बिना जब मर्जी प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा देती है जिससे दामों में अचानक गिरावट आ जाती है. एक बार दाम गिरने के बाद उसमें सुधार होने में समय लग जाता है. इस बार दाम गिरने का ही रिजल्ट है कि किसान अगले सीजन में प्याज की कम खेती के बारे में सोच रहे हैं.
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