पारंपरिक बीजों के रखवाले हैं पद्मश्री नेक राम शर्मा, किसानों को सिखा रहे प्राकृतिक खेती

पारंपरिक बीजों के रखवाले हैं पद्मश्री नेक राम शर्मा, किसानों को सिखा रहे प्राकृतिक खेती

हिमाचल प्रदेश के पद्मश्री डॉ. नेक राम शर्मा प्राकृतिक खेती और पारंपरिक बीजों को बचाने की मुहिम चला रहे हैं. वह एक ही खेत में 9 तरह के अनाज उगाते हैं और गोबर-गोमूत्र के जरिए खेती को बढ़ावा देते हैं.

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पारंपरिक बीजों के रखवाले हैं पद्मश्री नेक राम शर्मा, किसानों को सिखा रहे प्राकृतिक खेतीपद्मश्री नेक राम शर्मा

एक ही खेत में नौ किस्म के अनाज उगाना, रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाना और पहाड़ी गाय के गोबर और गोमूत्र से खेती करना. हिमाचल प्रदेश के पद्मश्री डॉ. नेक राम शर्मा खेती के इसी तरीके को बढ़ावा दे रहे हैं. उनका मकसद मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ पारंपरिक बीजों और अनाज की पुरानी किस्मों को बचाना है. इसके लिए उन्होंने दुर्लभ बीजों का अपना सीड बैंक भी तैयार किया है, जिसमें अनाज की सैकड़ों किस्में संरक्षित हैं.

एक खेत में उगाते हैं नौ तरह के अनाज

डॉ. नेक राम शर्मा एक ही खेत में नौ किस्म के अनाज उगाते हैं. इस तरीके में अलग-अलग फसलों को एक साथ इस तरह लगाया जाता है कि वे एक-दूसरे के पूरक बन सकें. इससे फसल विविधता को बढ़ावा मिलता है और मिट्टी के पोषण को बनाए रखने में मदद मिल सकती है. उनकी खेती का तरीका इस बात पर जोर देता है कि किसान केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों को भी अपनाएं. इससे खेती में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का रास्ता खुल सकता है.

पहाड़ी गाय के गोबर और गोमूत्र से खेती

डॉ. नेक राम शर्मा रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बजाय पहाड़ी गाय के गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल करके खेती करते हैं. उनका मानना है कि प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता सुधारने और खेती में रसायनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. उनका दावा है कि इस पद्धति से सिंचाई के पानी की जरूरत में 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है. हालांकि, पानी की बचत का वास्तविक स्तर फसल, मिट्टी, मौसम और खेती के तरीके पर भी निर्भर करता है.

दुर्लभ बीजों को बचाने के लिए बनाया सीड बैंक

डॉ. नेक राम शर्मा का मानना है कि अगर पारंपरिक बीजों और अनाज की पुरानी किस्मों को समय रहते नहीं बचाया गया, तो वे धीरे-धीरे खत्म हो सकती हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा किया और दुर्लभ बीजों को इकट्ठा करके अपना सीड बैंक तैयार किया. इस सीड बैंक में अनाज की सैकड़ों किस्मों को संरक्षित किया गया है. उनका प्रयास है कि पारंपरिक अनाज, दालों, सब्जियों और फलों की किस्में अगली पीढ़ियों तक पहुंचें और किसान खेती में विविधता बनाए रखें.

किसानों को बीज बांटकर आगे बढ़ा रहे अभियान

डॉ. नेक राम शर्मा केवल खुद इस पद्धति से खेती नहीं करते, बल्कि दूसरे किसानों को भी इसके लिए जागरूक कर रहे हैं. वे किसानों को पारंपरिक बीज बांटते हैं और उनसे कहते हैं कि वे आगे कम से कम पांच से दस अन्य किसानों तक भी ये बीज पहुंचाएं. इस तरह बीजों को एक किसान से दूसरे किसान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, ताकि पुरानी किस्में ज्यादा लोगों तक पहुंच सकें और उनका संरक्षण किया जा सके.

पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक सोच का मेल

डॉ. नेक राम शर्मा की खेती का मुख्य उद्देश्य मिट्टी, पानी और बीजों का संरक्षण करना है. वे पारंपरिक खेती के तरीकों को वैज्ञानिक सोच के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने पर जोर देते हैं. उनका मानना है कि खेती में विविधता बढ़ाने, स्थानीय बीजों को बचाने और प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करने से किसानों को लंबे समय में फायदा मिल सकता है. डॉ. नेक राम शर्मा की पहल किसानों को यह संदेश देती है कि खेती में नई तकनीकों के साथ पारंपरिक ज्ञान का भी महत्व है. अगर किसान अपनी जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इन तरीकों को अपनाते हैं, तो वे मिट्टी की सेहत और जैव विविधता को बचाने की दिशा में योगदान दे सकते हैं. (विशेषर नेगी की रिपोर्ट)

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