
ड्रेगन फ्रूट किसानगुजरात के भावनगर जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए बेहतर आमदनी का जरिया बनकर उभरी है. पारंपरिक फसलों की तुलना में ज्यादा मुनाफा मिलने से किसान अब बागवानी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. जिले के घोघा तालुका के नागाधनीबा गांव के पास खेती करने वाले किसान जगदीशभाई खासिया इसकी एक मिसाल हैं. कपास, बाजरा और मूंगफली की खेती छोड़कर उन्होंने पांच साल पहले ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और अब प्रति बीघा करीब 2 लाख रुपये की आमदनी हासिल कर रहे हैं.
जगदीशभाई ने बताया कि पारंपरिक फसलों में कड़ी मेहनत के बावजूद संतोषजनक लाभ नहीं मिल रहा था. ऐसे में उन्होंने अपनी 25 बीघा जमीन में से 7 बीघा पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की. उन्होंने कहा कि एक बीघा से करीब 2 लाख रुपये की आय होती है, जिसमें 1 से 1.5 लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा बच जाता है. इस अतिरिक्त आय का सबसे बड़ा फायदा उनके परिवार और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है.

जगदीशभाई ड्रैगन फ्रूट की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से करते हैं. उन्होंने बताया कि खेत में रासायनिक उर्वरकों, डीएपी या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. पौधों के लिए गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जाता है. बेहतर उत्पादन के लिए रात के समय पौधों के बीच बल्ब जलाए जाते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त रोशनी मिलती है और फ्रूटिंग में सुधार होता है. उनकी बाकी जमीन पर अभी भी कपास और बाजरा की खेती की जाती है.

भावनगर जिला बागवानी विभाग के अधिकारी एम.बी. वाघमाशी ने कहा कि जिले के विभिन्न तालुकों में 25 से 30 किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं. जिले में करीब 45 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है. लाल ड्रैगन फ्रूट की बाजार में सबसे अधिक मांग है, इसलिए इसकी खेती ज्यादा की जाती है. वहीं, तलाजा के लिलीवाव गांव में पीले ड्रैगन फ्रूट की भी खेती हो रही है.

बागवानी विभाग के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने में शुरुआती लागत करीब 7 लाख रुपये तक आती है. इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार हर साल 3.50 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराती है. अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती निवेश के बाद रखरखाव पर कम खर्च आता है और किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है. यही वजह है कि जिले में अधिक किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. (नितिन गोहिल की रिपोर्ट)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today