देसी गाय के गोबर से तैयार किया समरानी कपअगर आप ये सोचते हैं की गाय के गोबर का इस्तेमाल सिर्फ खेतों में आप कर सकते हैं तो आप शायद सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं. आइए आपको बताते हैं सहारनपुर के 71 साल के किसान आदित्य त्यागी के बारे में, जो गाय के गोबर से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने देसी गाय के गोबर से ऐसा काम शुरू किया, जिससे आज उन्हें हर महीने लाखों रुपये की कमाई हो रही है. उनके बनाए सम्भरानी कप यानी धूनी कप की मांग देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी लोग उनके उत्पाद खरीद रहे हैं.
सहारनपुर के महरवानी गांव के रहने वाले आदित्य त्यागी पहले फॉरेस्ट रेंजर के पद पर काम करते थे. नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने देसी गाय पालना शुरू किया. उनका मकसद था कि गाय के दूध से अच्छी कमाई हो. लेकिन कुछ समय बाद उन्हें लगा कि केवल दूध बेचने से उतना फायदा नहीं हो रहा है, जितनी उन्हें उम्मीद थी. इसके बाद उन्होंने सोचा कि गाय से मिलने वाली दूसरी चीजों का भी इस्तेमाल किया जाए. इसी सोच ने उनके लिए कमाई का नया रास्ता खोल दिया.
आदित्य त्यागी ने देसी गाय के गोबर का इस्तेमाल करके सम्भरानी कप बनाने का काम शुरू किया. इसे कई जगह धूनी कप भी कहा जाता है. इसे घर में जलाकर धूनी दी जाती है. इससे घर में खुशबू फैलती है. उन्होंने गोबर में गूगल और लोबान जैसी प्राकृतिक चीजें मिलाईं. इसके बाद इस मिश्रण से कप का आकार बनाया जाता है. इन्हें अच्छी तरह सुखाया जाता है. सूखने के बाद इन्हें पैक करके बाजार में भेजा जाता है. इस पूरे काम में गोबर को फेंका नहीं जाता, बल्कि उसे एक उपयोगी सामान में बदल दिया जाता है. यही उनके कारोबार की सबसे खास बात है.
आदित्य त्यागी के मुताबिक, एक सम्भरानी कप बनाने में करीब 10 ग्राम देसी गाय का गोबर लगता है. एक कप की कीमत करीब 10 रुपये पड़ती है. इस तरह देखा जाए तो गोबर की कीमत काफी बढ़ जाती है. उनके बनाए सम्भरानी कप थोक में करीब 90 रुपये में बिकते हैं. वहीं ऑनलाइन बाजार में इनकी कीमत करीब 220 रुपये तक बताई गई है. अलग-अलग जगह कीमत में बदलाव हो सकता है. यानी जिस गोबर को कई लोग बेकार समझते हैं, उसका सही तरीके से इस्तेमाल करके वह अच्छी कमाई कर रहे हैं.
आदित्य त्यागी का यह उत्पाद अब केवल उनके गांव या आसपास के इलाके तक सीमित नहीं है. उनके सम्भरानी कप की बिक्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से हो रही है. अमेजन समेत कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से ऑर्डर मिल रहे हैं. बताया गया है कि दक्षिण भारत से उनके उत्पाद की सबसे ज्यादा मांग आ रही है. इससे उन्हें अपने गांव में रहकर ही दूसरे राज्यों तक अपना सामान पहुंचाने का मौका मिल रहा है.
आदित्य त्यागी ने बताया कि इस साल उन्होंने करीब 20 हजार सम्भरानी कप तैयार किए हैं. इनमें से करीब 7 से 8 हजार कप एक महीने के अंदर ही बिक गए. उत्पाद की बढ़ती मांग को देखते हुए वह इस काम को और बड़ा करना चाहते हैं. उनके लिए यह केवल कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि देसी गाय और उसके गोबर के बेहतर इस्तेमाल का एक तरीका भी है.
आदित्य त्यागी का कहना है कि इस काम से उन्हें अब नौकरी के समय मिलने वाली सैलरी से भी ज्यादा कमाई हो रही है. खास बात यह है कि इस काम से सिर्फ उन्हें ही फायदा नहीं हो रहा है. उन्होंने करीब 5 से 7 लोगों को रोजगार भी दिया है. यानी गोबर से शुरू हुआ यह छोटा सा काम अब दूसरे लोगों के लिए भी कमाई का साधन बन गया है. उनके यहां गोबर को तैयार करना, कप बनाना, सुखाना, भरना, पैक करना और ऑर्डर भेजने जैसे कई काम किए जाते हैं.
आदित्य त्यागी का कहना है कि बाजार में मिलने वाले कई सम्भरानी कप कोयले से बनाए जाते हैं. उन्होंने इसके मुकाबले देसी गाय के गोबर और प्राकृतिक सामग्री से अपना उत्पाद तैयार करने की कोशिश की है. उनका उद्देश्य ऐसा उत्पाद बनाना है, जिसमें प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल हो और जिसे लोग घर में धूनी के लिए इस्तेमाल कर सकें. हालांकि किसी भी धुएं वाले उत्पाद को जलाते समय कमरे में पर्याप्त हवा का आना-जाना रखना जरूरी है.
आदित्य त्यागी की कहानी बताती है कि किसी चीज की कीमत सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि वह हमें कितनी साधारण लगती है. सही सोच और मेहनत से गोबर जैसी चीज का भी अच्छा इस्तेमाल किया जा सकता है. उनका मानना है कि अगर देसी गाय के गोबर का सही और व्यावसायिक तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो पशुपालकों को दूध के साथ-साथ गोबर से भी अच्छी कमाई हो सकती है. आज सहारनपुर के इस किसान का काम उन लोगों के लिए एक उदाहरण बन गया है, जो देसी गाय पालने को कम कमाई वाला काम मानते हैं. आदित्य त्यागी ने दिखाया है कि अगर काम करने का तरीका नया हो, तो गोबर भी रोजगार, कारोबार और कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है.
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