स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक नए और उज्ज्वल भविष्य का खाका खींचा. उन्होंने देश के अन्नदाताओं को नमन करते हुए कहा कि 21वीं सदी का भारत अब केवल पुरानी लीक पर नहीं चलेगा, बल्कि कृषि को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़कर इसे एक 'ग्लोबल पावर' बनाएगा. प्रधानमंत्री ने देशवासियों और किसानों को यह समझाया कि अब समय आ गया है कि हम अपनी खेती के तौर-तरीकों को बदलें. उन्होंने कहा कि सरकार 'बीज से बाजार तक' की ऐसी पक्की व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें किसान को सिर्फ अपनी फसल बेचने की ही फिक्र न रहे, बल्कि वह अपनी उपज का मालिक बनकर उसे पूरी दुनिया में शान से बेच सके. यह विजन देश के हर छोटे-बड़े किसान को आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत कदम है.
प्रधानमंत्री ने केमिकल-फ्री और प्राकृतिक खेती (को खेती-बाड़ी का असली भविष्य बताते हुए इसे एक 'हाईवे' करार दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज पूरी दुनिया में सेहत को लेकर जागरूकता बहुत बढ़ गई है और लोग ऐसे खाने-पीने की चीजें ढूंढ रहे हैं जो रसायनों से एकदम मुक्त हों. पीएम मोदी ने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाएं, क्योंकि इससे न केवल हमारी खेत की मिट्टी उपजाऊ और सेहतमंद बनती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय अनाजों की साख भी ऊंची होती है. उन्होंने कहा कि अगर हम जहरले कैमिकल छोड़कर कुदरती तरीकों का सही इस्तेमाल करेंगे, तो हम अपनी जमीन को भी बचाएंगे और दुनिया भर के बाजारों में अपने माल के अच्छे दाम पाकर अपनी कमाई को कई गुना बढ़ा लेंगे. यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक साफ-सुथरी और सेहतमंद विरासत छोड़ने जैसा होगा.
इसी विकास यात्रा में 'बायो-इकोनॉमी'प्रधानमंत्री के विजन का एक बहुत अहम हिस्सा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वक्त 'कचरे से कंचन' बनाने का है. प्रधानमंत्री ने किसानों को समझाया कि पराली या खेत-खलिहान का जो कचरा पहले किसी काम का नहीं समझा जाता था, वही अब बायो-एनर्जी और बायोगैस का सबसे बड़ा जरिया बनेगा. सरकार अब ऐसे आधुनिक प्लांट और तकनीक पर काम कर रही है, जिससे किसान अपने खेत के कचरे से बिजली और खाद बनाकर अपनी कमाई का एक और नया रास्ता खोल सकें. यह बायो-इकोनॉमी न सिर्फ हमारे पर्यावरण को साफ-सुथरा रखेगी, बल्कि भारत को ऊर्जा के मामले में भी पैरों पर खड़ा करेगी, जिससे हमारे गांव आने वाले समय में 'एनर्जी हब' के रूप में चमकेंगे.
प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की साख और ब्रांडिंग मजबूत करने पर भी खास जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत के पास अलग-अलग मौसम और मिट्टी के क्षेत्र हैं, जो हमें पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा 'फूड बास्केट' बनाते हैं. सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हम देश भर में ऐसी आधुनिक लैब और टेस्टिंग सेंटर बना रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय पैमानों पर बिल्कुल खरे उतरेंगे. इससे दुनिया का भरोसा भारतीय अनाजों, मसालों और जैविक खेती पर और ज्यादा बढ़ेगा. उन्होंने देश के नौजवानों से भी कहा कि वे नई तकनीक और एग्री-स्टार्टअप्स के जरिए खेती से जुड़ें, क्योंकि तकनीक ही वह ताकत है जो हमारे किसान की खून-पसीने की मेहनत को ग्लोबल लेवल पर सही पहचान दिलाएगी.
आखिर में प्रधानमंत्री ने एक विकसित भारत के निर्माण में हमारे किसानों की भूमिका को सबसे ऊपर रखा. उन्होंने कहा कि सरकार खेती में नई तकनीक और नवाचार का जो तालमेल बिठा रही है, उसका सीधा फायदा किसान की जेब और उसके परिवार की खुशहाली पर पड़ेगा. उन्होंने देश के हर नागरिक से अपील की कि वे 'वोकल फॉर लोकल' के मंत्र को अपनाकर अपने ही देश के किसानों के उत्पादों को खरीदें, ताकि हमारी इकोनॉमी को मजबूती मिले. यह स्वतंत्रता दिवस सिर्फ एक जश्न नहीं है, बल्कि एक पक्का संकल्प है—एक ऐसे भारत का जहाँ किसान तकनीक से लैस हो, खेत कैमिकल से आज़ाद हों, और भारत का कृषि उत्पाद पूरी दुनिया में शान का प्रतीक बने. पीएम मोदी का यह साफ पैगाम है कि अगर हम अपनी मिट्टी से जुड़े रहकर मॉडर्न टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे, तो देश को 'विकसित राष्ट्र' बनने से कोई नहीं रोक सकता.
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