
खेती को केवल गुजर-बसर का साधन मानने वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक कृषि तकनीक अब आमदनी बढ़ाने का मजबूत जरिया बन रही है.इसका उदाहरण कोरबा जिले के ग्राम पतरापाली की महिला किसान श्रीमती राजश्री मार्को ने पेश किया है. उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से टमाटर की खेती कर सीमित भूमि और संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अच्छी आय हासिल की है.
राजश्री मार्को ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से विभागीय योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की. इसके बाद वर्ष 2024-25 में उन्होंने 1.20 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड टमाटर की खेती शुरू की. खेती में उन्होंने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे फसल को जरूरत के मुताबिक पानी और पोषण मिला तथा खेत में नमी लंबे समय तक बनी रही.
आधुनिक तकनीक और मेहनत का परिणाम टमाटर की बंपर उपज के रूप में सामने आया. राजश्री मार्को ने एक सीजन में करीब 100 से 120 टन उच्च गुणवत्ता वाले टमाटर का उत्पादन हासिल किया. बाजार में उपज बेचने के बाद उन्होंने करीब 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया.
यह उपलब्धि न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाली है, बल्कि यह भी दिखाती है कि वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर किसान सीमित क्षेत्र में भी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं.
टमाटर की खेती में ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल राजश्री के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ. इस तकनीक के जरिए पौधों की जड़ों तक आवश्यकता के अनुसार पानी पहुंचाया गया. इसके साथ ही घुलनशील उर्वरकों को भी सिंचाई के माध्यम से पौधों तक पहुंचाने में मदद मिली.इससे पानी का प्रभावी उपयोग, पौधों को संतुलित पोषण और फसल की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित हुई.पारंपरिक सिंचाई की तुलना में ड्रिप प्रणाली ने खेत में पानी के प्रबंधन को अधिक आसान बनाया.
राजश्री ने खेत में मल्चिंग शीट का भी इस्तेमाल किया.इसका सबसे बड़ा फायदा खेत की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने और अनावश्यक खरपतवार के विकास को नियंत्रित करने में मिला.खरपतवार कम होने से निराई-गुड़ाई के लिए लगने वाला श्रम और समय घटा. वहीं मिट्टी में नमी बने रहने से पौधों को अनुकूल वातावरण मिला और फसल के विकास में भी सुधार हुआ.इस तरह मल्चिंग ने लागत कम करने और उत्पादन बेहतर करने में अहम भूमिका निभाई.
आधुनिक तकनीक से खेती करने के बाद मिले बेहतर परिणामों ने राजश्री मार्को का आत्मविश्वास बढ़ाया है.अब वह खुद आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को अपनाने के साथ आसपास के किसानों को भी इन तकनीकों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित कर रही हैं.उनके खेत को देखने और खेती की आधुनिक तकनीक को समझने के लिए आसपास के किसान भी पहुंच रहे हैं. इससे क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीक आधारित खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है.
राजश्री मार्को की सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के कई किसान अब ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और उन्नत उद्यानिकी फसलों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है.इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ ऐसी तकनीकों से जोड़ना है, जिनसे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके.
राजश्री मार्को की कहानी यह साबित करती है कि खेती में सिर्फ जमीन का आकार ही सफलता तय नहीं करता. सही तकनीक, बेहतर प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान सीमित क्षेत्र में भी बेहतर उत्पादन और आय हासिल कर सकते हैं.
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों ने जहां पानी और श्रम के बेहतर इस्तेमाल में मदद की, वहीं हाइब्रिड टमाटर की खेती ने उनकी आमदनी बढ़ाने का अवसर दिया.उनकी सफलता अब कोरबा क्षेत्र में अन्य किसानों के लिए आधुनिक और लाभकारी खेती की प्रेरक मिसाल बन रही है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today