जालना के किसानों ने अपनाई सामूहिक खेती, कई देशों में आर्गेनिक भिंडी के एक्‍सपोर्ट से बढ़ी कमाई

जालना के किसानों ने अपनाई सामूहिक खेती, कई देशों में आर्गेनिक भिंडी के एक्‍सपोर्ट से बढ़ी कमाई

महाराष्ट्र के जालना जिले के पिठोरी सिरसगांव के 27 से 30 किसानों ने सामूहिक खेती अपनाकर ऑर्गेनिक भिंडी की खेती शुरू की है. उनकी भिंडी जर्मनी, जापान और इंग्लैंड समेत कई देशों में निर्यात हो रही है. कंपनी खेत से ही फसल खरीदती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और बाजार की चिंता से राहत मिली है.

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जालना के किसानों ने अपनाई सामूहिक खेती, कई देशों में आर्गेनिक भिंडी के एक्‍सपोर्ट से बढ़ी कमाईकिसान आर्गेन‍िक भि‍ंडी की सामूहिक खेती से कमा रहे मुनाफा

महाराष्ट्र के जालना जिले के अंबड तहसील स्थित पिठोरी सिरसगांव के किसानों ने सामूहिक खेती अपनाकर उपज को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ दिया है. गांव के करीब 27 से 30 किसान मिलकर ऑर्गेनिक तरीके से भिंडी की खेती कर रहे हैं. यहां पैदा होने वाली भिंडी अब जर्मनी, जापान, इंग्लैंड और लंदन जैसे विदेशी बाजारों तक पहुंच रही है. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. गांव में करीब 30 से 40 एकड़ क्षेत्र में भिंडी की खेती की जा रही है. यह कम अवधि की फसल है, जिसकी बुवाई के लगभग 40 दिन बाद तुड़ाई शुरू हो जाती है. इसके बाद करीब 60 से 70 दिनों तक लगातार उत्पादन मिलता है. कम समय में आय मिलने के कारण यह खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो रही है.

ड्रिप सिंचाई और ऑर्गेनिक खेती पर फोकस

पानी की कमी और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए किसानों ने ड्रिप इरिगेशन तकनीक अपनाई है. खेतों में पानी का नियोजित इस्‍तेमाल किया जाता है. बेहतर क्‍वालिटी बनाए रखने के लिए ऑर्गेनिक खाद और ऑर्गेनिक स्प्रे का इस्तेमाल किया जाता है. किसानों ने कहा कि एक एकड़ से हर दिन करीब एक से ढाई क्विंटल तक भिंडी का उत्पादन हो रहा है.

कंपनी करती है बीज से लेकर खरीद तक की व्यवस्था

किसानों ने कहा क‍ि मुंबई की थ्री सर्कल एग्रो एक्सपोर्ट कंपनी उन्‍हें खेती के लिए बीज और ऑर्गेनिक दवाइयां उपलब्ध कराती है. फसल तैयार होने के बाद कंपनी के कर्मचारी सीधे खेत पर पहुंचकर भिंडी खरीद लेते हैं. खेत से पैकिंग सेंटर तक ट्रांसपोर्ट का खर्च भी कंपनी ही उठाती है. इससे किसानों को बाजार में खरीदार तलाशने या मंडी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.

नासिक में ग्रेडिंग, मुंबई से विदेश रवाना होती है खेप

खेत से खरीदी गई भिंडी को नासिक स्थित पैकिंग हाउस भेजा जाता है. वहां क्‍वालि‍टी के आधार पर उसकी छंटाई और ग्रेडिंग की जाती है. इसके बाद पैकिंग कर भिंडी को मुंबई एयरपोर्ट पहुंचाया जाता है, जहां से इसकी खेप जर्मनी, जापान, इंग्लैंड और अन्य विदेशी बाजारों के लिए रवाना होती है.

किसानों को मिल रहा बेहतर दाम

किसानों ने बताया कि फिलहाल भिंडी का भाव करीब 25 से 28 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. मांग बढ़ने पर इससे ज्‍यादा कीमत भी मिल जाती है. किसानों का कहना है कि तय खरीद व्यवस्था होने से उन्हें फसल की बिक्री को लेकर अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता.

इस खेती मॉडल का लाभ सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है. भिंडी की तुड़ाई के लिए गांव की महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है. सुबह से शाम तक दो शिफ्ट में तुड़ाई का काम होता है. इससे युवाओं और खेत मजदूरों को भी गांव में ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर आय बढ़ी है.

कृषि विभाग दे रहा तकनीकी मार्गदर्शन

अंबड के तालुका कृषि अधिकारी और उनकी टीम किसानों को आधुनिक खेती, पानी के बेहतर प्रबंधन और फसल उत्पादन की तकनीकों पर मार्गदर्शन दे रही है. किसान भिंडी के साथ-साथ शिमला मिर्च और टमाटर जैसी फसलों को भी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं, ताकि बाजार की मांग के अनुसार खेती की जा सके.

किसानों को हो रहा अच्‍छा मुनाफा

कुछ किसानों ने दो एकड़ क्षेत्र में भिंडी की खेती कर लाखों रुपये का कारोबार किया है. किसानों ने कहा कि एक एकड़ में भि‍ंडी की खेती में करीब 50 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि इससे एक से डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा निकल सकता है. कम अवधि की फसल, नियंत्रित सिंचाई, ऑर्गेनिक उत्पादन और सुनिश्चित बाजार ने इस मॉडल को किसानों के लिए फायदेमंद बना दिया है.

किसान तुकाराम काकडे, सचिन काकडे, संभाजी काकडे और धर्मराज काकडे ने कहा कि सामूहिक खेती और कंपनी की सीधी खरीद व्यवस्था से उनकी आय में सुधार हुआ है. उन्‍होंने कहा कि अगर ज्‍यादा किसान इस मॉडल से जुड़ते हैं तो गांव से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कृषि उत्पाद पहुंचाने का दायरा और बढ़ सकता है.

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