
ड्रेगन फ्रूट की खेती से बढ़ी किसान की कमाई (फोटो/जनसंपर्क विभाग)मध्य प्रदेश के नीमच जिले के ग्राम हाड़ी पिपलिया के किसान हरीश पाटीदार ने साबित कर दिया कि समय के साथ खेती में बदलाव अपनाने से आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है. कभी सोयाबीन, मक्का, गेहूं, चना, सरसों, लहसुन और धनिया जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले हरीश को बढ़ती लागत के बीच सीमित आमदनी ही मिल पाती थी. ऐसे में उन्होंने खेती को नए नजरिए से देखने का फैसला किया और अब वह अपनी 7 एकड़ जमीन पर बागवानी फसलों की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं.
हरीश पाटीदार बताते हैं कि बेहतर विकल्प की तलाश में उन्होंने मध्य प्रदेश के कई जिलों और महाराष्ट्र का दौरा किया. वहां सफल किसानों से आधुनिक बागवानी और ज्यादा मूल्य वाली फसलों की खेती की जानकारी जुटाई. इसके बाद उन्होंने अपने खेत में गुलाब, गेंदा और ड्रैगन फ्रूट की कमर्शियल खेती शुरू की. उत्पादन बढ़ाने के लिए ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को भी अपनाया. साथ ही कृषि विशेषज्ञों से पोषण प्रबंधन, कीट नियंत्रण और उन्नत खेती के लिए नियमित गाइडेंस लेते रहे.

हरीश के खेत में नई तकनीकों और फसल विविधीकरण का असर जल्द ही दिखाई देने लगा. वर्तमान में हरीश 3 एकड़ में गुलाब, 2 एकड़ में गेंदा और 2 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं. इन फसलों से उन्हें हर साल करीब 14.72 लाख रुपये की आय होती है. उत्पादन लागत निकालने के बाद लगभग 8 लाख रुपये की उनकी सालाना बचत होती है. पहले जहां पारंपरिक खेती से उन्हें प्रति हेक्टेयर करीब 1.50 लाख रुपये की आय होती थी, वहीं अब उनकी खेती कहीं ज्यादा फायदेमंद बन चुकी है.

हरीश पाटीदार की सफलता का असर उनके गांव में भी देखने को मिला है. उनकी प्रेरणा से गांव के 4 किसानों ने गुलाब और 5 किसानों ने गेंदा की खेती शुरू कर दी है. वे इच्छुक किसानों को अपने खेत पर बुलाकर आधुनिक खेती की तकनीक समझाते हैं और फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. उनका लक्ष्य अपने गांव को फूलों की खेती के लिए अलग पहचान दिलाना है.
हरीश पाटीदार कहते हैं कि खेती में इनोवेशन अपनाए बिना बेहतर कमाई हासिल करना मुश्किल है. आधुनिक तकनीकों और ज्यादा कीमत वाली फसलों की खेती से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है. वे अपनी सफलता का श्रेय कृषि और बागवानी विभाग से मिले तकनीकी सहयोग और किसानों के लिए चलाए जा रहे प्रोत्साहन कार्यक्रमों को भी देते हैं.
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