बंजर जमीन पर तैयार की नींबू की बगिया, ICAR की मदद से किसान ने लिखी सफलता की नई कहानी

बंजर जमीन पर तैयार की नींबू की बगिया, ICAR की मदद से किसान ने लिखी सफलता की नई कहानी

अरुणाचल प्रदेश के एक किसान ने बंजर जमीन को कमाई का जरिया बनाकर मिसाल पेश की है. आईसीएआर (ICAR) के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अपनी बंजर जमीन पर जैविक असम नींबू का बाग तैयार किया. आज यही बाग उन्हें अच्छी पैदावार और मुनाफा दे रहा है.

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बंजर जमीन पर तैयार की नींबू की बगिया, ICAR की मदद से किसान ने लिखी सफलता की नई कहानीनींबू की खेती

जहां कभी बंजर जमीन पर कुछ उगने की उम्मीद नहीं थी, आज वहीं हरे-भरे नींबू के पेड़ लहलहा रहे हैं. दरअसल, अरुणाचल प्रदेश के गोरी-II गांव के किसान मिनजो बसर ने आईसीएआर (ICAR) के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से बंजर जमीन को जैविक असम नींबू के बाग में बदलकर सफलता की नई कहानी लिख दी है. आज उनकी यह पहल दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. आइए जानते हैं किसान मिनजो बसर की सफलता की कहानी.

बंजर जमीन को बनाया हरा-भरा बाग

पहले जिस जमीन का कोई खास उपयोग नहीं हो रहा था, आज वहीं नींबू के हरे-भरे पेड़ लहलहा रहे हैं. वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक खेती की तकनीकों को अपनाकर किसान ने अपनी जमीन को एक सफल जैविक बाग में बदल दिया. इससे न केवल उनकी कमाई बढ़ी, बल्कि इलाके के अन्य किसानों के लिए भी वो प्रेरणा का स्रोत बन गए.

200 पौधों से शुरू हुई सफलता की कहानी

किसान मिनजो बसर ने करीब 0.2 हेक्टेयर भूमि पर असम नींबू के 200 पौधे लगाए. उन्होंने शुरुआत से ही जैविक खेती को अपनाया और रासायनिक खादों के बजाय प्राकृतिक तरीकों से फसल तैयार की. वहीं, आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने समय-समय पर उन्हें पौधों की देखभाल, पोषण प्रबंधन और बागवानी की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी.  मेहनत और सही तकनीक का परिणाम यह रहा कि किसान ने अपने बाग से 1.2 टन (1,200 किलोग्राम) बढ़िया क्वालिटी वाले असम नींबू का उत्पादन किया. अच्छी क्वालिटी के कारण बाजार में उन्हें बेहतर कीमत मिली और उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई. वहीं, इस जैविक नींबू की खेती से किसान को 22,000 रुपये की शुद्ध कमाई हुई.

ICAR के मार्गदर्शन से मिली सफलता

इस सफलता के पीछे आईसीएआर, एपी सेंटर, बसर के वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. संस्थान ने किसान को जैविक खेती अपनाने, पौधों के सही प्रबंधन और टिकाऊ कृषि तकनीकों के बारे में प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी. इसी का परिणाम है कि एक बेकार पड़ी जमीन आज नियमित आय का स्रोत बन गई है. वहीं, किसान मिनजो बसर की यह सफलता बताती है कि अगर किसान वैज्ञानिक सलाह, जैविक खेती और बागवानी जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो कम जमीन से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. यह मॉडल खासकर उन किसानों के लिए प्रेरणादायक है, जिनकी जमीन बंजर या कम उपजाऊ है.

वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

विशेषज्ञों का मानना है कि फलों की बागवानी और जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती है. आईसीएआर जैसी संस्थाओं के सहयोग से किसान नई तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बना सकते हैं. किसान मिनजो बसर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही सोच, मेहनत और वैज्ञानिक मार्गदर्शन से बंजर जमीन को भी सफलता की नई पहचान दी जा सकती है. 

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