ड्रैगन फ्रूट की खेतीबिहार में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसका एक शानदार उदाहरण किशनगंज जिले के किसान हंसराज नखत हैं. उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर ड्रैगन फ्रूट की खेती में आधुनिक तकनीक अपनाई और आज बेहतर उत्पादन के साथ अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. उनकी सफलता की कहानी दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. हंसराज नखत ने अपनी खेती में ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक मल्चिंग तकनीक को अपनाया. इन दोनों तकनीकों की मदद से पानी की बचत हुई, फसल की अच्छी बढ़वार हुई, साथ ही उत्पादन और कमाई बढ़ी. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
किसान हंसराज नखत ने बताया कि पारंपरिक तरीके से ड्रैगन फ्रूट की खेती में प्रति हेक्टेयर औसतन 12 टन उत्पादन मिलता था. लेकिन आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद यह बढ़कर 16 टन प्रति हेक्टेयर हो गया. यानी उन्हें प्रति हेक्टेयर लगभग 4 टन अतिरिक्त उत्पादन मिलने लगा. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रिप सिंचाई से पौधों की जड़ों तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचता है. इससे पानी की बर्बादी नहीं होती और पौधे स्वस्थ रहते हैं. इसके अलावा प्राकृतिक मल्चिंग मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार कम करने और मिट्टी की क्वालिटी सुधारने में मदद करती है.
ड्रैगन फ्रूट की आधुनिक खेती से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. पहले जहां इस खेती से लगभग 20 लोगों को रोजगार मिलता था, वहीं नई तकनीक अपनाने के बाद यह संख्या बढ़कर 30 लोगों तक पहुंच गई है. इससे स्थानीय लोगों को गांव में ही रोजगार मिलने लगा है. किसान हंसराज नखत ने बताया कि आधुनिक तकनीक अपनाने के कारण शुरुआती लागत जरूर बढ़ी है. पारंपरिक खेती में जहां प्रति हेक्टेयर करीब 8 लाख रुपये की लागत आती थी, वहीं आधुनिक तकनीक के साथ यह बढ़कर 12 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई. किसान ने बताया कि पहले जहां ड्रैगन फ्रूट से करीब 1 लाख रुपये प्रति टन की शुद्ध आय होती थी, वहीं आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद यह बढ़कर 1.5 लाख रुपये प्रति टन तक पहुंच गई.
हंसराज नखत की सफलता यह साबित करती है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अधिक कमाई की जा सकती है. ड्रैगन फ्रूट जैसे बागवानी फसलों में ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक मल्चिंग का इस्तेमाल किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है. साथ ही बिहार सरकार और उद्यान विभाग भी किसानों को आधुनिक खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक किसान ऐसी तकनीकों का उपयोग करें, तो राज्य में बागवानी का उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में इजाफा होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
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