भारत में बढ़ा खाद्य तेलों का आयातदेश में तिलहन उत्पादन और खाद्य तेलों के आयात को लेकर सरकार ने संसद में अहम जानकारी दी है. लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने एक लिखित जवाब में बताया कि साल 2024-25 के दौरान भारत ने 160.72 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया. इनमें 75.17 लाख टन पाम ऑयल शामिल रहा, जो कुल खाद्य तेल आयात का 46.77 प्रतिशत है.
वहीं, सरकार ने यह भी बताया कि देश में तिलहन उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है और इसका उत्पादन बढ़कर 430 लाख टन से अधिक हो गया है. सरकार का कहना है कि तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत किसानों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम की जा सके.
संसद में सरकार ने बताया, भारत में तिलहन उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, साल 2023-24 में 39.67 मिलियन टन तिलहन उत्पादन था, जो 2025-26 में बढ़कर 43.06 मिलियन टन हो गया है. राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (एनएमईओ-ओएस) के तहत 2025-26 में वैल्यू चेन क्लस्टरों के माध्यम से किसानों को मुफ्त बीज बांटे गए, जिससे 13.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया. यह 10 लाख हेक्टेयर के सालाना लक्ष्य से काफी अधिक है. साथ ही, नई तैयार तिलहन किस्मों के बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 60 सीड हब और 50 विशेष बीज भंडारण यूनिटों को मंजूरी दी गई है.
हालांकि देश में तिलहन उत्पादन बढ़ रहा है, फिर भी खाद्य तेलों के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार, भारत ने साल 2024-25 में 160.72 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया. इनमें पाम तेल की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जिसका आयात 75.17 लाख टन रहा. यह कुल खाद्य तेल आयात का लगभग 46.77 प्रतिशत है.
पाम तेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने अगस्त 2021 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) शुरू किया. यह योजना 15 राज्यों में लागू की जा रही है और इसमें पूर्वोत्तर राज्यों को खास प्राथमिकता दी गई है. मिशन के तहत किसानों को क्वालिटी वाले पौधे, इंटरक्रॉपिंग फसल के लिए सहायता, चार साल की शुरुआती अवधि में रखरखाव सहायता और पुराने बागानों को फिर से लगाने की सुविधा दी जाती है. इसके अलावा कृषि मशीनरी, सिंचाई, नर्सरी, बीज उद्यान और कस्टम हायरिंग सेंटरों के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है. पूर्वोत्तर राज्यों में ऑयल पाम प्रोसेसिंग मिल लगाने के लिए भी वित्तीय मदद दी जा रही है.
वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 2.73 लाख हेक्टेयर नया क्षेत्र ऑयल पाम खेती के दायरे में लाया गया, जिससे 31 मार्च 2026 तक कुल क्षेत्र 6.40 लाख हेक्टेयर पहुंच गया. इस दौरान 114.66 लाख टन फ्रेश फ्रूट बंच (एफएफबी) का उत्पादन हुआ, जिससे 20.10 लाख टन क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) मिला. मौजूदा समय में देश में 27 ऑयल पाम प्रोसेसिंग मिलें काम कर रही हैं.
ऑयल पाम किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए मिशन के तहत दाम के अंतर का भुगतान (वीजीपी) भी दिया जाता है. अब तक गोवा, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, असम और मिजोरम के 9,244 किसानों को इस योजना के तहत कुल 18.90 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है.
खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (एनएमईओ-ओएस) को मंजूरी दी थी. इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2022-23 के 39 मिलियन टन तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन तक पहुंचाना है.
यह मिशन क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम करता है. देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर बनाए गए हैं, जिन्हें किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियां और अन्य संस्थाएं चलाती हैं. इन क्लस्टरों के माध्यम से किसानों को मुफ्त अच्छी क्वालिटी के बीज, नई अधिक उपज देने वाली किस्मों की जानकारी और आधुनिक खेती की तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके अलावा तेल मिलों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना और आधुनिकीकरण को भी बढ़ावा दिया जाता है.
मिशन के तहत प्रजनक बीजों (जिन बीजों से नए पौधे तैयार होते हैं) की खरीद पर 100 प्रतिशत सहायता उपलब्ध है. साथ ही, सीड हब और विशेष बीज भंडारण यूनिटों को लगाकर प्रमाणित बीजों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है. किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और नई तकनीकों को खेत तक पहुंचाने के लिए फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी), क्लस्टर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (सीएफएलडी) और ब्लॉक स्तरीय डेमोंस्ट्रेशन (बीएलडी) भी आयोजित किए जा रहे हैं. इससे किसानों को बेहतर किस्मों और उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद मिल रही है.
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