बकरी पालन से मिला रोजगारगुजरात के जामनगर जिले में एक किसान ने रोजगार और पैसों की परेशानी के बीच बकरी पालन को कमाई का नया जरिया बनाया है. तमाचल गांव के पशुपालक हथाभाई छावालिया ने सरकार की पशुपालन योजना का लाभ लेकर बकरी पालन शुरू किया. सरकारी मदद से उन्होंने 11 बकरियां खरीदीं. इनमें एक नर बकरा और 10 मादा बकरियां शामिल हैं. अब बकरी पालन से उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने की उम्मीद है.
तमाचल गांव के रहने वाले हथाभाई छावालिया के सामने रोजगार और आर्थिक परेशानियां थीं. ऐसे समय में उन्हें पशुपालन विभाग की बकरी पालन योजना के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने इस योजना का लाभ उठाकर बकरी पालन शुरू करने का फैसला किया. सरकारी सहायता से उन्होंने कुल 11 बकरियां खरीदीं. इनमें एक नर और 10 मादा बकरियां हैं. हथाभाई का कहना है कि सरकार से मिले लोन और मदद की वजह से वह यह काम शुरू कर पाए हैं. अब वह बकरियों को पालकर अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
जामनगर के पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार, बकरी पालन योजना के तहत किसानों और पशुपालकों को बकरियां खरीदने में आर्थिक सहायता दी जाती है. योजना में 11 बकरियां खरीदने के लिए 60 हजार रुपये तक का खर्च पात्र माना गया है. इसमें नर बकरा यानी बक भी शामिल है. इसके अलावा बकरियों के लिए बाड़ लगाने, रहने के लिए शेड बनाने और चारा उपलब्ध कराने के लिए भी 60 हजार रुपये तक का खर्च पात्र है. यानी योजना के तहत कुल मिलाकर 1.20 लाख रुपये तक के खर्च को शामिल किया जा सकता है.
जामनगर के पशु चिकित्सा विभाग के मेडिकल ऑफिसर डॉ. जीडी गुज्जर के मुताबिक, योजना के तहत लाभार्थी को कुल खर्च या योजना के तहत तय पात्र राशि का 50 प्रतिशत तक आर्थिक लाभ मिल सकता है. इसमें जो राशि कम होगी, उसी के आधार पर सहायता दी जाएगी. उदाहरण के तौर पर अगर किसी किसान ने योजना के नियमों के अनुसार 60 हजार रुपये खर्च किए हैं, तो उसे तय नियमों के तहत इसकी 50 प्रतिशत राशि तक सहायता मिल सकती है. इसी तरह बकरियों के शेड, बाड़ और चारे के लिए भी योजना में तय सीमा के अनुसार मदद मिलती है.
बकरी पालन में सिर्फ बकरियां खरीदना ही जरूरी नहीं है. उनके रहने के लिए सुरक्षित जगह, बाड़ और पर्याप्त चारे की भी जरूरत होती है. सरकार की योजना में इन जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है. योजना के तहत किसान बकरियों के लिए शेड बना सकते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए बाड़ लगा सकते हैं. साथ ही, चारे की व्यवस्था पर भी तय सीमा तक खर्च किया जा सकता है. इससे छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बकरी पालन शुरू करना आसान हो सकता है.
सरकारी मदद सिर्फ बकरियां खरीदने तक सीमित नहीं है. पशुपालकों को पशु चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं. बकरियों की सेहत ठीक रखना उनके पालन में बहुत जरूरी है, क्योंकि बीमार होने पर पशुपालक को नुकसान हो सकता है. जामनगर में पशुपालकों के लिए पशु अस्पताल और इलाज की सुविधा उपलब्ध है. पशुपालक अपने बीमार या कमजोर पशुओं को यहां लाकर उनका इलाज करा सकते हैं. इससे पशुओं की सेहत बेहतर रखने में मदद मिलती है.
जामनगर के एक अन्य पशुपालक सब्बर हुसैन ने भी पशु चिकित्सा सेवाओं को लेकर संतोष जताया. उनका कहना है कि यहां पशुओं के इलाज की सुविधाएं अच्छी हैं और उन्हें इसका फायदा मिल रहा है. पशुपालक अपने पशुओं को अस्पताल लाकर इलाज करा सकते हैं. पशुपालकों के लिए ऐसी सुविधाएं इसलिए भी जरूरी हैं, क्योंकि पशुओं की बीमारी का सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ता है. समय पर इलाज मिलने से पशुओं को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है.
बकरी पालन ग्रामीण इलाकों में छोटे किसानों और परिवारों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकता है. जिन लोगों के पास खेती से बहुत ज्यादा आमदनी नहीं होती, वे पशुपालन के जरिए अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं. जामनगर में चल रही यह योजना किसानों को बकरी पालन के लिए आर्थिक मदद के साथ-साथ जरूरी सुविधाएं देने पर जोर देती है. बकरियां खरीदने, शेड बनाने, बाड़ लगाने और चारे की व्यवस्था के साथ पशु चिकित्सा सुविधा मिलने से पशुपालकों को अपना काम आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
हथाभाई छावालिया जैसे किसान अब बकरी पालन को अपनी आय का एक नया साधन बना रहे हैं. सरकारी आर्थिक सहायता और पशु चिकित्सा सेवाओं के सहारे ग्रामीण परिवार अपने स्तर पर रोजगार खड़ा कर सकते हैं. सरकार का उद्देश्य ऐसी योजनाओं के जरिए ग्रामीण परिवारों को पशुपालन से जोड़ना और उनकी आमदनी को मजबूत करना है. खेती के साथ बकरी पालन जैसी गतिविधियां किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का साधन बन सकती हैं. जामनगर के इस किसान की कहानी भी बताती है कि सही सरकारी मदद मिलने पर छोटे स्तर से शुरू किया गया पशुपालन का काम परिवार की आय बढ़ाने का रास्ता खोल सकता है.
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