
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) ने किसानों को उन्नत और गुणवत्तायुक्त करेला बीज उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. संस्थान ने अपनी उत्कृष्ट करेला लाइन ‘वीआरबीटीजी-4’ के तकनीकी हस्तांतरण और व्यावसायिक उत्पादन के लिए Comienzo Agriscience Limited के साथ लाइसेंस समझौता किया है. इस पहल से किसानों को जल्द ही अधिक उत्पादन देने वाली और रोग सहनशील करेला किस्म का लाभ मिल सकेगा.
समझौते पर संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य ऐसी तकनीकों का विकास करना है जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करें.
संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार करेला की उन्नत लाइन ‘वीआरबीटीजी-4’ कई महत्वपूर्ण गुणों से युक्त है. विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में किए गए परीक्षणों में इस किस्म ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है.
यह किस्म अधिक पैदावार देने में सक्षम है, जिससे किसानों को प्रति एकड़ बेहतर उत्पादन मिल सकेगा.
इसके फल का आकार, रंग और स्वाद बाजार की मांग के अनुरूप पाया गया है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी.
यह लाइन कई प्रमुख बीमारियों के प्रति सहनशील मानी जा रही है. इससे किसानों का कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होगा और उत्पादन लागत घटेगी.
डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि निजी बीज कंपनियों के साथ साझेदारी से संस्थान द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों और बीजों का बड़े स्तर पर उत्पादन संभव हो सकेगा. इससे किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध होंगे और रोपण सामग्री की कमी दूर होगी.
उन्होंने कहा कि लाइसेंस आधारित तकनीकी हस्तांतरण मॉडल सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करता है तथा अनुसंधान संस्थानों और किसानों के खेतों के बीच की दूरी कम करने में मदद करता है.
कार्यक्रम का समन्वयन इंदीवर प्रसाद ने किया. उन्होंने बताया कि संस्थान की प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई (ITMU) लगातार संस्थान के नवाचारों और तकनीकों को लाइसेंसिंग और व्यावसायीकरण के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है.
समारोह में डॉ. ए. एन. सिंह, डॉ. डी. पी. सिंह, डॉ. एस. के. सिंह, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. सुदर्शन मौर्य और डॉ. केशव गौतम सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे.
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