उर्वरकों के दुरुपयोग और कालाबाजारी को रोकने के लिए फार्मर आईडी के आधार पर ही की जाएगी बिक्रीमिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जंग के बाद उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, प्रदेश में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है. वर्तमान में प्रदेश में 13.28 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 05.23 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 04.81 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 03.69 लाख मीट्रिक टन एसएसपी एवं 0.93 लाख मीट्रिक टन एमओपी को मिलाकर कुल 27.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में 3.13 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध है.
कृषि निदेशक डॉ. पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने को संकल्पित है. इसी के दृष्टिगत कृषि विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों के लिए अनुदान पर सभी प्रकार के उर्वरकों को उपलब्ध कराया जा रहा है. कृषि विभाग द्वारा किसानों की आवश्यकतानुसार रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के सक्रिय सहयोग से प्रचुर मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है. उन्होंने बताया कि आगामी खरीफ फसलों की मांग के अनुसार भारत सरकार द्वारा लगातार आवंटन करते हुए उर्वरकों की निरन्तर आपूर्ति की जा रही है.
डॉ. त्रिपाठी ने आगे बताया कि अनुदानित उर्वरक का दुरुपयोग रोकने के लिए शासन द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि उर्वरकों का विक्रय किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) उपलब्ध कराने वाले किसानों को उनकी जोत सम्बन्धी अभिलेखों के आधार पर ही किया जाएगा. वहीं, कृषि विभाग द्वारा अनुदानित उर्वरकों (यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी एवं एसएसपी) के साथ किसी अन्य निवेश की टैगिंग को पूर्णतया प्रतिबंधित किया गया है.
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों की सुगमतापूर्वक खरीद के लिए फार्मर आईडी के साथ विक्रय केन्द्रों पर पहुंचें और अपनी बोई गई फसल के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा संस्तुत मात्रा के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों की खरीद एवं प्रयोग करें.
कृषि निदेशक का कहना है कि कृषि भूमि/खतौनी के आधार पर फसल की अवस्था एवं आवश्यकता के अनुसार अधिकतम 5 बोरी डीएपी तथा यूरिया 7 बोरी प्रति हेक्टेयर की मात्रा का ही क्रय किया जाये. विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों के अत्यधिक क्रय एवं अनावश्यक प्रयोग से बचें. उन्होंने बताया कि उर्वरकों की अत्यधिक खरीद तथा भण्डारण न करें, क्योंकि हवा व नमी आदि के सम्पर्क में आने पर उर्वरक की क्षमता में क्षरण होने लगता है, इसलिए किसान वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक का क्रय करें.
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