फसल में कीट-रोग दिखे तो न करें ये गलती!खरीफ सीजन में फसलों को कीट और रोगों से बचाने के लिए बिहार के किसानों को जागरूक किया जा रहा है. इसी कड़ी में आत्मा सुपौल (ATMA Supaul) की ओर से जिले के सभी प्रखंडों में किसानों के साथ बैठक आयोजित की गई. ये बैठकें 10 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक चलीं. इसमें किसानों को धान और सब्जियों की फसल में लगने वाले कीट और रोगों की पहचान और उनसे बचाव के आसान तरीकों के बारे में बताया गया.
आत्मा सुपौल की ओर से जिले के सभी प्रखंडों में किसान बैठक का आयोजन किया गया. इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसलों में होने वाली बीमारियों और कीटों की समय पर पहचान करने के बारे में जानकारी देना था. बैठक में किसानों को बताया गया कि अगर फसल में किसी तरह के कीट या बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं, तो समय रहते उसकी पहचान करना जरूरी है. सही समय पर उपाय करने से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
बैठकों में धान और सब्जियों की फसलों में लगने वाले अलग-अलग कीट और रोगों के बारे में किसानों को जानकारी दी गई. किसानों को बताया गया कि केवल कीटनाशक का इस्तेमाल करना ही फसल बचाने का एकमात्र तरीका नहीं है. फसल की नियमित निगरानी, बीमारी की सही पहचान और जरूरत के हिसाब से उचित प्रबंधन करना ज्यादा जरूरी है. किसानों को फसल में समस्या दिखाई देने पर बिना जानकारी के किसी भी दवा का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई.
किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई. बैठक में बताया गया कि खेत में अधिक मात्रा में रासायनिक खाद डालने से फसल को हमेशा फायदा नहीं होता. इससे खेती की लागत बढ़ सकती है और मिट्टी पर भी असर पड़ सकता है. इसी तरह बिना बीमारी या कीट की सही पहचान किए बार-बार कीटनाशक का छिड़काव करने से भी बचना चाहिए. किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और जरूरत के अनुसार ही खाद और दवाओं का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया गया.
बैठक में किसानों को संतुलित उर्वरक यानी खाद के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी गई. किसानों से कहा गया कि फसल की जरूरत के अनुसार सही मात्रा में अलग-अलग पोषक तत्व देना जरूरी है. किसानों को इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट (INM) यानी एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में भी बताया गया. इसका उद्देश्य मिट्टी और फसल की जरूरत के हिसाब से पोषक तत्वों का सही इस्तेमाल करना है, ताकि फसल की अच्छी पैदावार के साथ मिट्टी की सेहत भी बनी रहे.
किसानों को बताया गया कि खरीफ फसलों में कीट और रोगों का प्रबंधन एक साथ कई तरीकों से किया जा सकता है. फसल की निगरानी, सही कृषि तकनीक, संतुलित खाद और जरूरत के अनुसार दवाओं का इस्तेमाल करके फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है. किसानों से अपील की गई कि वे बिना सलाह के रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें. वैज्ञानिक और एकीकृत तरीके अपनाकर खेती करने से खेती की लागत कम करने और फसल को नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है.
खरीफ सीजन में धान और सब्जियों की फसल में कई तरह के कीट और रोग लग सकते हैं. अगर इनकी समय पर पहचान नहीं की जाए तो फसल को नुकसान हो सकता है. ऐसे में किसानों को सही जानकारी देना जरूरी है. सुपौल में आयोजित इन बैठकों के जरिए किसानों को फसल की निगरानी से लेकर खाद और कीटनाशक के सही इस्तेमाल तक की जानकारी दी गई. इससे किसानों को अपनी फसल में आने वाली समस्याओं को पहचानने और उनका उचित तरीके से प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है.
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