धान की जड़ में घुसकर उसकी बढ़वार रोक देता है यह कीड़ा, लक्षण और रोकथाम के जान लें उपाय

धान की जड़ में घुसकर उसकी बढ़वार रोक देता है यह कीड़ा, लक्षण और रोकथाम के जान लें उपाय

सूत्रकृमि से निजात पाने के लिए खेतों की मई-जून में 10-15 दिनों के अंतराल पर गहरी जुताई करें, पर पाटा न लगाएं ताकि सूत्रकृमि (अंडे और किशोर अवस्था) सूर्य की गर्मी से नष्ट हो जाएं. खेत को खरपतवार से मुक्त रखें, तभी सूत्रकृमि की समस्या से निपटा जा सकता है.

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धान की जड़ में घुसकर उसकी बढ़वार रोक देता है यह कीड़ा, लक्षण और रोकथाम के जान लें उपायधान में जड़ सूत्रकृमि फसल को बहुत नुकसान पहुंचाता है

देश के कई हिस्से ऐसे भी हैं जहां अभी धान की खेती हुई है. ऐसे इलाके के किसानों को फसल को लेकर खास ध्यान रखना चाहिए. धान के नए पौधों को जड़ सूत्रकृमि बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. इससे पनपने वाला रोग बहुत खतरनाक होता है. धान उगाए जाने वाले लगभग सभी क्षेत्रों में इस सूत्रकृमि की समस्या देखी जाती है. सेम वाले इलाके में इसकी समस्या अधिक है. यह स्थान बदलने वाला अंतः परजीवी सूत्रकृमि है जो जड़ों के अंदर घुसकर पूरी बढ़वार के समय तक फसल को हानि पहुंचाता है.

ऐसे में इस सूत्रकृमि से किसानों को सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह पौधे को बढ़ने नहीं देता और छोटी अवस्था में ही चौपट कर देता है. आइए सबसे पहले इस सूत्रकृमि के लक्षण जान लेते हैं ताकि इसके रोग को पकड़ने और फिर इलाज करने में आसानी होगी.

सूत्रकृमि का लक्षण

  • इससे प्रभावित धान के पौधे बौने रह जाते हैं और उनमें फुटाव कम होता है.
  • सूत्रकृमि कीड़े से प्रभावित धान के पौधे में बाली एक सप्ताह देर से निकलती है और पकने में भी अधिक समय लेती है.
  • इससे ग्रसित धान के पौधे की जड़ें छोटी रह जाती हैं और उन पर भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं. बाद में पूरी जड़ें गहरे रंग की हो जाती हैं.
  • इस सूत्रकृमि के प्रभाव से धान की पैदावार में कमी आती है. इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है.

सूत्रकृमि की रोकथाम

  • धान की पनीरी यानी कि नर्सरी बोने से पहले क्यारियों में फ्यूराडॉन-3 (कार्बोफ्यूरॉन) 13 किलो प्रति एकड़ की दर से डालें.
  • प्याज, लहसुन या सरसों के साथ फसलचक्र अपनाकर भी इस सूत्रकृमि के प्रकोप से बचा जा सकता है. इससे फसल को बचाया जा सकता है.
  • इस सूत्रकृमि से निजात पाने के लिए खेतों की मई-जून में 10-15 दिनों के अंतराल पर गहरी जुताई करें, पर पाटा न लगाएं ताकि सूत्रकृमि (अंडे और किशोर अवस्था) सूर्य की गर्मी से नष्ट हो जाएं.
  • खेत को खरपतवार से मुक्त रखें, तभी सूत्रकृमि की समस्या से निपटा जा सकता है.

सूत्रकृमि है बड़ी समस्या

धान में यह सूत्रकृमि क्यारियों और ऊपरी मिट्टी में पाया जाता है. यह धान के लिए बड़ी समस्या है. यह भारत के कई राज्यों में गहरे पानी में सिंचित धान में बड़े पैमाने पर पाया जाता है. इसके छोटे जीवनचक्र और विस्तृत परजीवी शृंखला कई खरपतवार प्रजातियों सहित जो धान के खेतों में आम हैं, इस प्रजाति को नियंत्रित करना मुश्किल बनाते हैं. इससे बचाव के लिए उपाय में कहा जाता है कि स्वस्थ पनीरी का ही प्रयोग करें. पनीरी लगाने वाले स्थान को हर बार बदलते रहें. इससे सूत्रकृमि लगने का खतरा कम होता है.

 

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