खाद वितरण केंद्र पर किसानों का हंगामा (सांकेतिक फोटो)खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब भारत की खेती पर दिखने की आशंका है. खरीफ सीजन से ठीक पहले फर्टिलाइजर सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे जुलाई-अगस्त में मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा गैप बनने का खतरा है.
फिलहाल राहत की बात यह है कि अप्रैल से जून तक स्थिति नियंत्रण में है. राजस्थान सरकार के मुताबिक इन महीनों में राज्य को करीब 6.15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत है, जबकि उपलब्ध स्टॉक 7.46 लाख मीट्रिक टन है—यानी मांग से ज्यादा. चूंकि इस दौरान खपत भी कम रहती है, इसलिए तत्काल संकट की स्थिति नहीं है. अप्रैल से जून के बीच फर्टिलाइजर की खपत सामान्य तौर पर कम रहती है. यही वजह है कि मौजूदा स्टॉक पर्याप्त माना जा रहा है.
यानी राज्य के पास जरूरत से ज्यादा उर्वरक मौजूद है, जिससे फिलहाल किसी संकट की आशंका नहीं है. उर्वरकों के प्रबंधन के लिए कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि दिनांक 01.04.2026 को राज्य (Rajasthan) में उपलब्ध उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है.
1 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध प्रमुख उर्वरकों का ब्रेकअप:
ये स्टॉक मुख्य रूप से खुदरा विक्रेताओं, सहकारी समितियों और थोक भंडारों में मौजूद है.
लेकिन असली चुनौती जून के बाद शुरू होती है. खरीफ सीजन के चलते जुलाई और अगस्त में उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़कर करीब 10 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है. वैश्विक हालात के कारण सप्लाई चेन प्रभावित रही तो यही बढ़ी हुई मांग संकट का रूप ले सकती है.
जुलाई और अगस्त में खरीफ सीजन के चलते खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है. यानी कुछ ही महीनों में मांग में तेज उछाल आता है, जो सप्लाई पर दबाव बनाता है.
इन तीनों के चलते जून के बाद गैप बढ़ सकता है और यही संभावित संकट की वजह है.
इसी संभावित दबाव को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें पहले से अलर्ट मोड में हैं. राज्य में उपलब्ध स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जा रहा है, ताकि कहीं जमाखोरी या गड़बड़ी न हो. उर्वरक वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए पीओएस मशीन के जरिए बिक्री अनिवार्य की गई है. साथ ही, कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए राजस्थान की सीमाओं पर चेकपोस्ट लगाने का फैसला किया गया है.
संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य ने कई कदम उठाए हैं:
राज्य में वर्तमान स्टॉक की बात करें तो यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी पर्याप्त मात्रा में खुदरा और थोक विक्रेताओं के पास मौजूद है, जिससे जून तक सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद है. केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने हालात की गंभीरता को देखते हुए सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की और साफ किया कि “हमने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि अगले 15 दिनों तक फर्टिलाइजर के फिजिकल स्टॉक का वेरिफिकेशन करें, ताकि कहीं भी कमी या गड़बड़ी की स्थिति न बने.”
उन्होंने यह भी कहा कि—“खाद की कालाबाजारी और डायवर्जन को रोकना हमारी प्राथमिकता है. हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है, ताकि किसानों को समय पर उर्वरक मिल सके.” यानी फिलहाल स्थिति संभली हुई है, लेकिन असली परीक्षा जुलाई-अगस्त में होगी—जब बढ़ती मांग, ग्लोबल सप्लाई दबाव और लॉजिस्टिक्स मिलकर फर्टिलाइजर सिस्टम की क्षमता को परखेंगे.(शरत कुमार की रिपोर्ट)
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