Fertilizer Price: यूरिया-डीएपी का कितना होगा दाम, मंत्रालय ने साफ कर दी तस्वीर

Fertilizer Price: यूरिया-डीएपी का कितना होगा दाम, मंत्रालय ने साफ कर दी तस्वीर

खरीफ सीजन से पहले सरकार ने राहत दी है कि यूरिया (45 किग्रा) 266.50 रुपये और डीएपी (50 किग्रा) 1350 रुपये की तय कीमत पर ही मिलेंगे. वैश्विक तनाव के बावजूद खाद की सप्लाई में कोई कमी नहीं होगी.

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Fertilizer Price: यूरिया-डीएपी का कितना होगा दाम, मंत्रालय ने साफ कर दी तस्वीरखादों के स्थिर रहेंगे दाम

खरीफ सीजन की बुवाई बहुत जल्द शुरू होने वाली है. इसमें धान की फसल सबसे प्रमुख है. इन फसलों की खेती में खाद की कोई किल्लत न हो, इसे लेकर सरकार हर तरह की तैयारी में जुटी है. हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव से खाद की सप्लाई पर पड़ा है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि खाद में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी. सरकार ने यह भी बता दिया कि खाद के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी. पहले से निर्धारित कीमतों पर ही खाद दी जाएगी.

उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने गुरुवार को बताया कि किसानों को उर्वरक निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. यूरिया (45 किग्रा) 266.50 रुपये और डीएपी (50 किग्रा) 1350 रुपये पर उपलब्ध है. उन्होंने कहा, खाद आपूर्ति, उत्पादन, आयात और वितरण निगरानी के लिए आपातकालीन नियंत्रण कक्ष सक्रिय है.

भारत में खाद की कमी नहीं

ईरान युद्ध को देखते हुए भारत में खाद संकट की आशंका जताई जा रही है. बाकी देशों में भी ऐसे ही हालात हैं. खाद उत्पादन में गिरावट के भी संकेत हैं. इस बीच, सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ सीजन में खाद की किल्लत नहीं होगी, और दाम भी पहले की तरह ही स्थिर रहेंगे. खरीफ फसलों के लिए यूरिया और डीएपी जैसी खादों की मांग अधिक होती है. 

स्थिर दामों पर खाद बिक्री का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत खुद दोगुने से भी अधिक कीमत पर विदेशों से यूरिया जैसी खाद खरीद रहा है. यूरिया का दुनिया का सबसे बड़ा इंपोर्टर, भारत, इस समय नाइट्रोजन आधारित खाद बहुत अधिक कीमतों पर खरीद रहा है, क्योंकि मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई कम हो रही है और रेट तेजी से भागे जा रहे हैं.

25 लाख टन यूरिया का आयात

'रॉयटर्स' की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत इस साल एक ही टेंडर में 25 लाख टन यूरिया का आयात कर सकता है, वह भी दोगुने रेट पर जबकि पिछले महीने ये कीमतें कम थी. ईरान युद्ध ने सप्लाई चेन को इस कदर बाधित किया है कि खादों के दाम आसमान छूने लगे हैं.

यूरिया का 25 लाख टन आयात देश की कुल जरूरतों का एक चौथाई हिस्सा है जिसे सरकार ने हरी झंडी दे दी है. भारत की इस खरीद से दुनिया भर में यूरिया के दाम बढ़ेंगे क्योंकि वैश्विक बाजारों में खादों की कमी और बढ़ेगी. सूत्रों के मुताबिक, इंडियन पोटाश लिमिटेड दो खेप में यूरिया खरीदने जा रही है. पहली खेप पश्चिमी तट के लिए 15 लाख टन की होगी जबकि दूसरी खेप पूर्वी तट के लिए 10 लाख टन की होगी.

सब्सिडी बिल बढ़ने का डर

खाद आयात की लागत बढ़ने से भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल बढ़ जाएगा, क्योंकि सरकार किसानों को बाजार भाव से कम कीमत पर फसल के पोषक तत्व बेचने के लिए फर्टिलाइजर कंपनियों को मुआवजा देती है.

मुंबई स्थित उर्वरक उद्योग के एक अधिकारी ने बताया कि भारत ने तो अपनी सप्लाई सुनिश्चित कर ली है, लेकिन अन्य खरीदारों को उर्वरक हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है, क्योंकि विदेशी कंपनियों ने पहले ही भारत को खेप भेजने का वादा कर दिया है.

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