यूरिया किल्लतपंजाब में धान सीजन की शुरुआत हो चुकी है और किसान अपने खेतों को रोपाई की तैयारी में जुट चुके हैं. लेकिन इस बार धान की फसल से पहले किसानों के सामने यूरिया खाद की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है. संगरूर जिले के किसानों का कहना है कि धान की खेती में यूरिया की सबसे अधिक जरूरत होती है और समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से उनकी फसल प्रभावित हो सकती है.
किसानों के अनुसार, एक एकड़ धान की फसल में औसतन तीन से चार बोरी यूरिया की आवश्यकता पड़ती है. वहीं, इस समय अंतरराष्ट्रीय हालात और खाड़ी देशों से खाद आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच पंजाब में भी यूरिया की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. किसानों का आरोप है कि सहकारी समितियों में आधार कार्ड या पासबुक के आधार पर सीमित मात्रा में ही यूरिया दिया जा रहा है, जिससे बड़ी जोत वाले और ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
किसान जगदेव सिंह ने बताया कि वह करीब 15 एकड़ खेती करते हैं और धान के सीजन में उन्हें लगभग 50 बोरी यूरिया की जरूरत पड़ती है. लेकिन वर्तमान स्थिति में उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही. उन्होंने कहा कि धान के साथ-साथ कई किसान मक्के की फसल भी बोते हैं, जिसमें भी यूरिया की आवश्यकता होती है. ऐसे में खाद की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खाद वितरण व्यवस्था में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हो रही हैं.
इसी तरह किसान जसवीर सिंह का कहना है कि उनके पास अपनी पांच एकड़ जमीन है, लेकिन उन्होंने 10 एकड़ अतिरिक्त जमीन ठेके पर भी ली हुई है. सहकारी समिति से उन्हें केवल अपनी जमीन के हिसाब से ही यूरिया मिल रहा है, जबकि कुल खेती के लिए उन्हें लगभग 30 बोरी यूरिया की जरूरत है. उन्होंने आरोप लगाया कि निजी डीलरों से खाद लेने पर यूरिया के साथ नैनो यूरिया और अन्य महंगे उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. किसान सतनाम सिंह ने कहा कि धान की फसल में यूरिया की खपत सबसे ज्यादा होती है और हर वर्ष कृषि विभाग पहले से इसकी व्यवस्था करता है. लेकिन इस बार किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं हो रहा, जिससे रोपाई सीजन के दौरान परेशानी बढ़ रही है.
वहीं, दूसरी ओर संगरूर के मुख्य कृषि अधिकारी धर्मिंदरजीत सिंह सिद्धू ने किसानों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि जिले की सभी सहकारी समितियों में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की सिफारिश के अनुसार प्रति एकड़ लगभग 120 किलो यूरिया की जरूरत होती है और उसी आधार पर किसानों को तीन बोरी प्रति एकड़ तक यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि यूरिया की आपूर्ति 60:40 अनुपात में सहकारी समितियों और निजी डीलरों के बीच वितरित की जाती है, इसलिए किसान आवश्यकता पड़ने पर निजी डीलरों से भी खाद खरीद सकते हैं. हालांकि, किसानों और कृषि विभाग के दावों के बीच जमीन पर हकीकत क्या है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा. फिलहाल धान सीजन के बीच यूरिया की उपलब्धता किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. (कुलवीर सिंह की रिपोर्ट)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today