खाद संकटपंजाब में खेती से जुड़े इनपुट की गुणवत्ता पर सख्ती बढ़ाते हुए कृषि विभाग ने बठिंडा में बड़ी कार्रवाई की है. विभाग की टीम ने गुरुवार को गुप्त सूचना के आधार पर शहर के मलोट रोड स्थित एक गोदाम में छापा मारकर करीब 140 क्विंटल अवैध उर्वरक जब्त किया. मामले में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि इस मामले में महाराष्ट्र के ठाणे स्थित के बी बायो-ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. साथ ही उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर निवासी रवि कुमार और महाराष्ट्र के सेबल अशांत हनुमंत को भी नामजद किया गया है. मामला बठिंडा के थर्मल पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है.
जांच के दौरान कृषि विभाग को पता चला कि गोदाम में रखा गया उर्वरक निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था. विभाग के अनुसार, संबंधित कंपनी के पास राज्य कृषि विभाग से वैध उर्वरक लाइसेंस भी नहीं था. इसके अलावा जिन परिसरों से कृषि इनपुट बेचे जा रहे थे, वहां केवल कीटनाशक कारोबार की अनुमति थी. इसे उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया.
कृषि मंत्री ने कहा कि जब्त की गई अवैध खाद अगर बाजार तक पहुंच जाती तो बड़े स्तर पर खेती को नुकसान पहुंच सकता था और किसानों के आर्थिक हित प्रभावित हो सकते थे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि इनपुट की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी.
मामले के बाद सभी मुख्य कृषि अधिकारियों को औचक निरीक्षण तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. मंत्री ने कहा कि उर्वरक नियंत्रण आदेश का उल्लंघन कृषि समुदाय के खिलाफ अपराध माना जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी. साथ ही किसानों से अपील की गई है कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से प्रमाणित खाद और बीज खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी नजदीकी कृषि कार्यालय को दें.
इधर, पंजाब में धान की बुवाई का सीजन तेज होने के बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे पी नड्डा को पत्र लिखकर डीएपी और यूरिया की निर्बाध और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है. पत्र में केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी 6 जून को केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बैठक में विस्तार से चर्चा भी हुई थी.
उन्होंने कहा कि राज्य में धान की बुवाई अब पूरी गति से चल रही है, ऐसे में किसानों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए खाद की आपूर्ति और बढ़ाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले से ही इस विषय की गंभीरता से अवगत है और आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है. इसके बावजूद पंजाब में जून और जुलाई के दौरान डीएपी और यूरिया की मांग सबसे अधिक रहती है, इसलिए इस अवधि में अतिरिक्त व्यवस्था जरूरी है. (पीटीआई)
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