बारां जिले में यूरिया खाद की भारी किल्लतबारां जिले में यूरिया खाद की कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खेती के लिए आवश्यक खाद न मिलने के कारण किसान और महिलाएं घंटों लाइनों में खड़े होने को मजबूर हैं. सरकार और प्रशासन के दावों के बावजूद जमीनी हालात बेहद खराब बने हुए हैं. बारां जिले की कई क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के बाहर सुबह 6 बजे से ही किसानों की लंबी लाइनें लगने लगती हैं. किसानों का कहना है कि सुबह जल्दी पहुंचने के बाद भी, दोपहर या शाम तक उनकी बारी नहीं आती है.
पूरा दिन इंतजार करने के बाद भी केवल दो से तीन कट्टा खाद ही मिल पाता है. इससे किसानों को काफी समय और मेहनत बर्बाद करनी पड़ रही है.
यूरिया की किल्लत का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर दिखाई दे रहा है. घरेलू कामकाज संभालने वाली महिलाएं सुबह-सुबह आधार कार्ड और जमीन की नकल लेकर समितियों के बाहर लाइन में लग जाती हैं. वे घंटों भूखी-प्यासी खड़ी रहती हैं और अपनी बारी का इंतजार करती रहती हैं. खाद लेने के लिए उन्हें पूरा दिन घर से बाहर रहना पड़ रहा है, जिससे उनके दैनिक कामकाज पर भी असर पड़ रहा है.
कई समितियों के बाहर पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति की वजह से लाइनें टूट जाती हैं और अव्यवस्था फैल जाती है.
कुछ जगहों पर धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखने को मिलती है. किसानों का आरोप है कि प्रशासन लाइन व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है.
राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन का कहना है कि बारां जिले में 2800 मेट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है और नए खाद के रैक भी लगातार आ रहे हैं. लेकिन हकीकत यह है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद मिल ही नहीं रही है. किसानों की भीड़ रोज बढ़ रही है और कतारें छोटी होने का नाम नहीं ले रही हैं.
किसानों ने सहकारी समितियों और डीलरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
उनका कहना है कि:
किसानों ने बताया कि वे सुबह घर से निकलते हैं और बिना खाना-पानी के दिनभर लाइन में बैठे रहते हैं.
दिनभर की मशक्कत के बाद उन्हें केवल दो-तीन कट्टा खाद मिल पाता है.
यह स्थिति किसानों के लिए बेहद अपमानजनक और दुखद बन चुकी है.
बारां जिले में यूरिया खाद की भारी कमी ने किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.
यदि प्रशासन और सरकार तुरंत कार्रवाई नहीं करती है, तो:
खाद वितरण को पारदर्शी बनाने और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाने की अत्यंत आवश्यकता है.
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