लीची के लिए टिप्स (सांकेतिक तस्वीर)अप्रैल महीने में बढ़ती गर्मी ने लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है. कई राज्यों में तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और गर्म हवाएं चलने लगी हैं. ऐसे में इस मौसम का असर खेतों और बागानों पर साफ-साफ दिखाई देने लगा है. खासकर लीची जैसी नाजुक और संवेदनशील फसल पर तेज गर्मी का असर अधिक दिखने लगा है. अगर समय पर देखभाल न की जाए, तो लीची की पैदावार घट सकती है और फलों की क्वालिटी भी खराब हो सकती है, इसलिए इस समय लीची उत्पादक किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आइए जानते हैं कैसे.
लीची की फसल को फल बनने और पकने के दौरान संतुलित तापमान, नमी और पानी की जरूरत होती है. लेकिन जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और लू चलती है, तो पेड़ों पर कई तरह का नकारात्मक असर पड़ता है. सबसे बड़ी समस्या छोटे फलों के झड़ने की होती है. तेज गर्मी और मिट्टी में नमी की कमी के कारण पेड़ सभी फलों को संभाल नहीं पाता और कई फल समय से पहले गिर जाते हैं. इससे कुल उत्पादन कम हो जाता है.
गर्मी बढ़ने पर लीची के फलों का आकार भी छोटा रह सकता है. अगर फल बनने के समय पौधों को पर्याप्त पानी नहीं दिया जाए, तो उनका विकास रुक जाता है. वहीं कई बार तेज गर्मी के बाद अचानक ज्यादा सिंचाई करने या मौसम में बदलाव होने से फल फटने लगते हैं. फटे हुए फलों की बाजार में मांग कम होती है और किसानों को कम दाम मिलता है.
तेज धूप का असर लीची के रंग और स्वाद पर भी पड़ता है. ज्यादा तापमान में फल का रंग फीका पड़ सकता है और गूदा कम रसदार हो सकता है. इससे क्वालिटी खराब होती है. इसके अलावा गर्म हवाओं से पेड़ों की पत्तियां झुलसने लगती हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और अगले सीजन पर भी असर पड़ सकता है.
गर्मी के मौसम में किसानों को नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे. बाग में सूखी घास, पत्तियां या भूसा बिछाकर मल्चिंग करने से जमीन जल्दी नहीं सूखती. वहीं, जहां सुविधा हो, वहां माइक्रो स्प्रिंकलर या फॉगिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पेड़ों को ठंडक मिलती है. साथ ही संतुलित पोषण देना जरूरी है, खासकर पोटाश, क्योंकि यह फल की क्वालिटी सुधारने में मदद करता है.
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