धान की नर्सरी खरीफ सीजन शुरू होते ही धान किसानों की खेतों में हलचल बढ़ गई है. किसान धान की खेती के लिए बिचड़ा डाल चुके हैं या तो डालने की तैयारी में हैं. इस बीच, किसानों की उम्मीद अब अच्छी पैदावार के लिए नर्सरी में तैयार हो रही पौध पर टिकी हुई है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की फसल की मजबूत शुरुआत स्वस्थ नर्सरी से होती है. यदि नर्सरी में समय पर सिंचाई, बीजोपचार और खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए, तो रोपाई के बाद पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फसल का उत्पादन भी बेहतर मिलता है. ऐसे में बिहार कृषि विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे नर्सरी तैयार करने के शुरुआती दिनों से ही विशेष सावधानी बरतें, ताकि खेत में रोपाई के समय उन्हें मजबूत और स्वस्थ पौधे मिल सकें.
कृषि विभाग का कहना है कि जिन किसानों ने अभी बिचड़ा नहीं बोया है वो बीज बोने से पहले बीजोपचार अवश्य करें. बीजोपचार से बीज जनित रोगों का खतरा कम हो जाता है और अंकुरण क्षमता बेहतर होती है. उपचारित बीजों से उगे पौधे अधिक मजबूत होते हैं, जिससे बाद धान की फसलों में रोगों का प्रकोप कम देखने को मिलता है.
इसके अलावा नर्सरी में समय पर सिंचाई भी बेहद जरूरी है. पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहे, इसके लिए खेत में पानी का उचित प्रबंधन करना चाहिए. अधिक पानी या पानी की कमी दोनों ही स्थितियां पौधों के विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं. इसलिए मौसम के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय करने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है. ऐसे में बीज बोने के बाद शुरुआती 3-5 दिन क्यारियों को सिर्फ नम रखें. इसके बाद, जब पौधे 1-2 इंच के हो जाएं, तो क्यारियों में लगभग 1 से 1.5 सेमी पानी भर कर रखें. मिट्टी को सूखने या दरारें पड़ने न दें.
खरपतवार नियंत्रण को भी नर्सरी प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. खरपतवार पौधों के साथ पोषक तत्वों, पानी और धूप को पौधों तक नहीं पहुंचने देते हैं, जिससे धान की पौध कमजोर हो सकती है. ऐसे में कृषि एक्सपर्ट किसानों को नियमित रूप से नर्सरी का निरीक्षण करने और समय रहते खरपतवार हटाने की सलाह देते हैं. जरूरत पड़ने पर खरपतवारनाशी का भी उपयोग किया जा सकता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, नर्सरी में रोग और कीटों की निगरानी भी लगातार करनी चाहिए. किसी भी प्रकार के संक्रमण या कीट के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए. इससे नुकसान को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है.
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