
बदलते मौसम, बढ़ती बीमारियों और खेती की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के बीच छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के किसानों के लिए एक नई उम्मीद की शुरुआत हुई है. नगरी विकासखंड के ग्राम केरेमुड़ा में किसानों को ग्राफ्टेड (कलमी) टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण देकर आधुनिक और जलवायु-अनुकूल खेती की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.इस पहल का उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीक से जोड़ना है, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन मिले और उनकी आय में स्थायी बढ़ोतरी हो सके.
इस अभियान के तहत नगरी विकासखंड के किसानों को 1 लाख 1 हजार 800 ग्राफ्टेड पौधे वितरित किए गए. इनमें 51,800 ग्राफ्टेड टमाटर और 50,000 ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे शामिल हैं.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राफ्टेड पौधे सामान्य पौधों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं. इनकी जड़ें अधिक विकसित होती हैं, जिससे पौधों में रोगों का प्रकोप कम होता है और प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर वृद्धि होती है. यही कारण है कि इन पौधों से उत्पादन अधिक और गुणवत्तापूर्ण मिलता है.
ग्राफ्टिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें दो अलग-अलग पौधों के गुणों को मिलाकर एक बेहतर पौधा तैयार किया जाता है.मजबूत और रोग प्रतिरोधी जड़ों वाले पौधे (रूटस्टॉक) पर अधिक उत्पादन देने वाली किस्म (सायन) को जोड़ा जाता है. इससे तैयार पौधा अधिक मजबूत होता है और लंबे समय तक बेहतर उत्पादन देता है.
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता खेत में आयोजित लाइव फील्ड डेमोंस्ट्रेशन रहा. किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं दी गई, बल्कि खेत में ही वैज्ञानिक तरीके से पौधों की रोपाई, मल्चिंग, नमी संरक्षण, पौधों की देखभाल और जैविक पोषण प्रबंधन का प्रदर्शन किया गया.
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (आईपीएम), मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैव उर्वरकों के उपयोग और फसल कटाई के बाद प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की भी जानकारी दी. संवाद सत्र में किसानों ने अपनी समस्याएं साझा कीं, जिनका मौके पर ही समाधान बताया गया.
इस अभियान को सफल बनाने में गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) और प्रदान (PRADAN) संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही. एफपीओ के माध्यम से किसानों को ग्राफ्टेड पौधे, जैविक खाद और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराई गई, जबकि प्रदान संस्था किसानों और कृषि सखियों को पूरे फसल चक्र के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दे रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान, वर्षा और कीट-रोगों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. ऐसे में ग्राफ्टेड पौधे किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन रहे हैं. ये पौधे विपरीत परिस्थितियों में भी टिकाऊ रहते हैं, जिससे फसल खराब होने का जोखिम कम होता है और उत्पादन स्थिर बना रहता है.
जिला पंचायत धमतरी के मार्गदर्शन में प्रशासन, प्रदान संस्था और गट्टासिल्ली एफपीओ की यह संयुक्त पहल केवल पौधे बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती से जोड़ने का प्रयास है.इससे न केवल सब्जी उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि खेती की लागत घटेगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी.
धमतरी का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है, जहां वैज्ञानिक तकनीकों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा रहा है.
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