बिहार में कृषि बिजली बिल की नई व्यवस्था लागू (फोटो-ITG)बीते दिनों बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किसानों को कृषि कार्यों के लिए सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. वहीं, अब कृषि बिजली का उपयोग करने वाले किसानों के लिए बिलिंग व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब तक किसानों को लगभग तीन महीने के अंतराल पर बिजली बिल जारी किया जाता था, लेकिन अब इसकी जगह मासिक बिलिंग व्यवस्था लागू कर दी गई है. सरकार के इस फैसले से किसानों के बीच मिला जुला असर देखने को मिल रहा है.
इस नए फैसले में साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) के महाप्रबंधक (राजस्व) अरविंद कुमार ने विद्युत कार्यपालक अभियंताओं, सहायक विद्युत अभियंताओं (राजस्व), सभी विद्युत आपूर्ति प्रमंडलों, कनीय विद्युत अभियंताओं (राजस्व) और सभी विद्युत आपूर्ति ब्रांचों को पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी है. पत्र में बताया गया है कि बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने Irrigation Agriculture Service – Category I (IAS-I, ट्यूबवेल, बोरवेल, पंपसेट आदि) में आने वाले किसानों के लिए वर्तमान मौसमी (सीजनल) बिलिंग व्यवस्था को समाप्त कर 1 जुलाई से मासिक बिलिंग सिस्टम लागू करने की मंजूरी दी है. इसके बाद खेती में बिजली इस्तेमाल करने वाले किसानों को हर महीने बिजली बिल जारी किया जाएगा.
रोहतास जिले के किसान अर्जुन सिंह कहते हैं कि उनका बिजली बिल सीजन के अनुसार जब आता है, तो वह करीब 2400 रुपये के आसपास होता है, जो एक बार में देने में थोड़ी दिक्कत आती है. लेकिन हर महीने देने पर राशि कम आएगी और उसे आसानी से जमा किया जा सकेगा. अर्जुन सिंह सब्जी की खेती करते हैं और उन्हें हर महीने खेत में सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होती है.
वहीं, धान-गेहूं की खेती करने वाले दरभंगा के किसान धीरेंद्र कहते हैं कि परंपरागत फसलों की खेती करने वाले किसानों को हर महीने या 10 से 12 दिन पर सिंचाई की जरूरत नहीं होती है. गेहूं की पूरी फसल के लिए दो से तीन बार ही पानी देना होता है. ऐसे किसानों के पास पैसा भी सीजन के अनुसार ही आता है. लेकिन महीने के अनुसार पैसा देना हो, तो यह नुकसानदेह है, क्योंकि ऐसे किसान हर महीने सिंचाई नहीं करते हैं. लेकिन बिल उन्हें हर महीने आएगा, तो वह कैसे देंगे?
राज्य में करीब 8 लाख से अधिक कृषि आधारित बिजली उपभोक्ता हैं. वहीं, महीने के अनुसार अगर बिल आता है, तो कुछ जानकारों का मानना है कि इससे बिजली बिल का अचानक बोझ नहीं पड़ेगा. साथ ही बिजली खपत की नियमित निगरानी भी होगी. वहीं, पटना के किसान अभिजीत सिंह कहते हैं कि अगर सालाना कृषि बिजली बिल 4800 रुपये आता है, तो पुराने नियम के अनुसार हर तीन महीने पर बिजली बिल करीब 1200 रुपये आता था. लेकिन अब यह राशि हर महीने करीब 400 रुपये के आसपास होगी.
हालांकि, बिहार में वैज्ञानिक और आधुनिक खेती करने वाले किसानों की तुलना में परंपरागत खेती करने वाले किसानों की संख्या ज्यादा है, जो धान, गेहूं, मक्का सहित अन्य फसलों की खेती करते हैं. वैसे किसानों के लिए यह जरूर परेशानी होगी, क्योंकि उनका बोरवेल, पंपसेट और ट्यूबवेल कम उपयोग होता है. लेकिन बिजली बिल हर महीने आने से उन्हें नुकसान होगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today