धान में रोग और कीटों का खतरा बढ़ामौसम में बदलाव के बीच किसानों को धान समेत दूसरी फसलों में रोग और कीटों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. कृषि परामर्श सेवाओं के कृषि वैज्ञानिकों ने 23 सितंबर 2026 तक के लिए किसानों को कृषि संबंधी सलाह जारी की है. इसमें धान की फसल की लगातार निगरानी करने के साथ अगेती मटर और गाजर की बुवाई और सरसों की अगेती खेती की तैयारी करने की सलाह दी गई है. इसके अलावा सब्जियों में कीट और रोग दिखाई देने पर समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाने को कहा गया है.
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस समय किसान अगेती मटर की बुवाई कर सकते हैं. इसके लिए पूसा प्रगति जैसी उन्नत किस्म का चुनाव किया जा सकता है. बुवाई से पहले बीजों को कवकनाशी कैप्टान या थायरम से 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करने और उसके बाद फसल विशेष राइजोबियम का टीका लगाने की सलाह दी गई है.
गाजर की खेती करने वाले किसान इस समय मेड़ों पर इसकी बुवाई कर सकते हैं. इसके लिए पूसा रुधिरा किस्म का इस्तेमाल किया जा सकता है. सामान्य तरीके से बुवाई के लिए करीब 4 किलो बीज प्रति एकड़ की जरूरत होगी. वहीं मशीन से बुवाई करने पर लगभग एक किलो बीज प्रति एकड़ में काम हो सकता है. खेत तैयार करते समय देसी खाद के साथ पोटाश और फास्फोरस देने की भी सलाह है.
आने वाले दिनों में सरसों की अगेती बुवाई को देखते हुए किसानों को अभी से बीज और खेत की तैयारी करने की सलाह दी गई है. किसान पूसा सरसों-25, पूसा सरसों-26, पूसा सरसों-28, पूसा अगर्णी, पूसा तारक और पूसा महक जैसी किस्मों के बीज की व्यवस्था कर सकते हैं.
इसके अलावा किसान सरसों साग की पूसा साग-1, पालक की ऑल ग्रीन और धनिया की पंत हरितमा जैसी किस्मों की बुवाई उथली क्यारियों या मेड़ों पर कर सकते हैं.
इस समय धान किसानों के लिए सबसे जरूरी सलाह खेतों की लगातार निगरानी की है. वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा है कि वे हर दो से तीन दिन में धान की फसल में ब्लास्ट यानी बदरा रोग की जांच करें. इस रोग की शुरुआत पत्तियों पर आंख जैसे छोटे धब्बों से होती है. धब्बे का अंदरूनी हिस्सा हल्का भूरा जबकि बाहर का हिस्सा गहरे भूरे रंग का दिखाई दे सकता है. बाद में कई छोटे धब्बे मिलकर बड़े धब्बे में बदल जाते हैं.
धान की पूसा सुगंध-2511 किस्म में आभासी कंड यानी फॉल्स स्मट की आशंका भी बताई गई है. इसमें धान के दाने असामान्य तरीके से फूलने लगते हैं. इसके नियंत्रण के लिए कृषि परामर्श में ब्लाइटॉक्स-50 की 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से जरूरत के अनुसार पानी में मिलाकर 10 दिन के अंतर पर 2-3 छिड़काव की सलाह दी गई है.
धान की फसल में ब्राउन प्लांट हॉपर यानी BPH का हमला भी शुरू हो सकता है. किसानों को खेत के अंदर जाकर पौधों के निचले हिस्से को देखने की सलाह दी गई है. यहां मच्छर जैसे छोटे कीट दिखाई देने पर सतर्क होने की जरूरत है. प्रकोप अधिक होने पर परामर्श के मुताबिक इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से साफ मौसम में छिड़काव किया जा सकता है.
वहीं तना छेदक की निगरानी के लिए खेत में 4 से 6 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाने की सलाह है. धान में पत्ती लपेटक का हमला होने पर किसान खेत में करीब 2 सेंटीमीटर पानी भरकर रस्सी की मदद से पौधों को हल्का झुका सकते हैं. इससे कीट पानी में गिर सकते हैं. इसके बाद पानी निकालकर कीटों को नष्ट किया जा सकता है.
मिर्च और बैंगन में फल और शीर्ष छेदक, जबकि फूलगोभी और पत्तागोभी में डायमंड बैक मोथ की निगरानी के लिए भी 4 से 6 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाने की सलाह दी गई है. मिर्च और टमाटर में वायरस से संक्रमित पौधे दिखाई दें तो उन्हें खेत से निकालकर जमीन में गाड़ने को कहा गया है.
सफेद मक्खी और दूसरे चूसक कीट दिखाई देने पर भी समय रहते नियंत्रण की सलाह है. साथ ही खेतों में दीमक के प्रकोप की निगरानी करने को कहा गया है.
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान रोग और कीट नियंत्रण के लिए दवाओं का इस्तेमाल करते समय निर्धारित मात्रा का पालन करें और छिड़काव साफ मौसम में ही करें. इससे दवा का बेहतर असर मिल सकता है और अनावश्यक इस्तेमाल से भी बचा जा सकता है.
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