महाराष्ट्र के 31 जिलों में कम बारिश का संकट, शरद पवार ने किसानों के लिए मांगे ₹50,000 प्रति हेक्टेयर

महाराष्ट्र के 31 जिलों में कम बारिश का संकट, शरद पवार ने किसानों के लिए मांगे ₹50,000 प्रति हेक्टेयर

महाराष्ट्र में कम बारिश और फसलों को हुए नुकसान के बीच NCP (SP) प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर प्रभावित तालुकाओं में सूखा घोषित करने की मांग की है. पवार ने किसानों को कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता, खेतिहर मजदूर परिवारों को 25,000 रुपये की मदद, कृषि ऋण माफी और नए फसल लोन देने की मांग भी की है.

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महाराष्ट्र के 31 जिलों में कम बारिश का संकट, शरद पवार ने किसानों के लिए मांगे ₹50,000 प्रति हेक्टेयरNCP (SP) प्रमुख शरद पवार (Photo: ITG)

NCP (SP) प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि वे बुरी तरह प्रभावित तालुकाओं में सूखा घोषित करें और बारिश की भारी कमी के कारण फसल के नुकसान का सामना कर रहे किसानों को कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता दें.

बुधवार को मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में, पवार ने बताया कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में अपर्याप्त बारिश के कारण सोयाबीन, कपास और दालों जैसी खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, साथ ही बुवाई का रकबा भी काफी कम हो गया है और पीने के पानी और चारे की भारी कमी हो गई है.

उन्होंने मांग की कि सरकार बिना किसी आधिकारिक औपचारिकता का इंतजार किए सूखा घोषित करे और प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल राहत जारी करे.

किसानों के लिए 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मांग

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों के लिए 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और खेतिहर मजदूर परिवारों के लिए विशेष सहायता के तौर पर 25,000 रुपये प्रति परिवार की मांग भी की.

उन्होंने कृषि ऋण माफी योजना को तत्काल लागू करने और नए फसल लोन उपलब्ध कराने की भी मांग की.

पवार ने अपने पत्र में नियमित रूप से लोन चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग की, और यह भी कहा कि जिन किसानों ने 2025-26 में फसल ऋण लिया था लेकिन इस साल चूक (डिफ़ॉल्ट) कर गए, उन्हें भी माफी योजना में शामिल किया जाए.

उन्होंने 1 रुपये वाली फसल बीमा योजना को पिछली तारीख से लागू करने (जिसमें पहले छोड़े गए ट्रिगर भी शामिल हों) और पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए फसल नुकसान के लिए घोषित 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि का तत्काल वितरण करने की भी मांग की.

बागों को बचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था करने की मांग

सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे क्षेत्रों के लिए, पवार ने रोजगार गारंटी योजना के तहत कृषि और जल संरक्षण से जुड़े विशेष कार्यों के साथ-साथ बागों को बचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था करने की मांग की.

उन्होंने पीने के पानी की कमी का सामना कर रहे गांवों का तत्काल सर्वेक्षण करने, जहां जरूरत हो वहां सरकारी टैंकर तैनात करने, चारा शिविर लगाने और पशुओं के लिए पीने का पानी और पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की.

पवार ने ऊर्जा विभाग से मांग की कि वे उन क्षेत्रों में बिजली ट्रांसफार्मर की समय पर मरम्मत सुनिश्चित करें जहां बिजली कटौती अधिक हो रही है.

उन्होंने बारिश, फसल और पशुओं की स्थिति, पानी की कमी और चारे की उपलब्धता की दैनिक निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाने की भी मांग की. पवार ने मुख्यमंत्री से यह भी अपील की कि वे सूखे से प्रभावित इलाकों के स्कूलों, कॉलेजों और दूसरे शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की सिर्फ परीक्षा फीस ही नहीं, बल्कि पूरी पढ़ाई की फीस माफ करें.

उन्होंने बताया कि कम बारिश की वजह से महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में हालात गंभीर हैं और किसान बहुत तनाव में हैं.

पवार ने कहा कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में औसत से काफी कम बारिश हुई है.

उन्होंने बताया कि 1 जून से 15 सितंबर के बीच राज्य में 648 मिमी बारिश हुई, जो औसत से 19 प्रतिशत कम थी.

उन्होंने कहा कि मुंबई, रायगढ़, पालघर और विदर्भ सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल हैं और कुछ जिलों में पिछले तीन महीनों के दौरान बारिश सामान्य से लगभग 60 प्रतिशत कम रही है.

मराठवाड़ा में सामान्य से 69 प्रतिशत कम बारिश

पवार ने बताया कि जून-अगस्त की अवधि में मराठवाड़ा में सामान्य से 69 प्रतिशत कम बारिश हुई, इसके बाद विदर्भ में 61 प्रतिशत और कोंकण में 33 प्रतिशत कम बारिश हुई, जबकि पश्चिमी और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ जिलों में 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.

उन्होंने कुछ इलाकों में बुआई वाले क्षेत्र में कमी की ओर भी इशारा किया. उन्होंने बताया कि विदर्भ में बुआई का क्षेत्र, जो पिछले साल अगस्त के अंत तक लगभग 50.04 लाख हेक्टेयर था, इस साल घटकर लगभग 47.5 लाख हेक्टेयर रह गया है.

उन्होंने आगे कहा कि मराठवाड़ा में भी बुआई का क्षेत्र पिछले साल के 48.21 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल 46.19 लाख हेक्टेयर हो गया है.

उन्होंने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अल-नीनो घटना का असर और भी गंभीर हो सकता है और इसके प्रभाव 2027 से दिखाई दे सकते हैं.(PTI)

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