
खेती में लगातार बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच किसानों के लिए एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा साबित हो सकता है. ऐसे में एकीकृत कृषि प्रणाली और फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आ रहे हैं.जशपुर जिले के किसान अनारथ साय ने भी खेती में इसी सोच को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
अनारथ साय का मानना है कि किसान अगर केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न फसलों और कृषि गतिविधियों को एकीकृत रूप से अपनाएं, तो खेती से जुड़े जोखिम को कम किया जा सकता है. साथ ही उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए सालभर आय के अलग-अलग स्रोत तैयार किए जा सकते हैं.
किसान अनारथ साय के अनुसार खेती में विविधता लाना आज के समय की जरूरत है. मौसम में बदलाव या किसी एक फसल के उत्पादन में नुकसान होने पर दूसरी फसल किसानों को आर्थिक सहारा दे सकती है. यही वजह है कि एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से अलग-अलग फसलों और कृषि गतिविधियों को जोड़कर आय के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
इस मॉडल की खासियत यह है कि किसान अपने उपलब्ध भूमि, पानी, श्रम और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकता है.इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ पूरे वर्ष आमदनी बनाए रखने की संभावना बढ़ती है.
जशपुर जिले में किसानों के बीच उद्यानिकी और संरक्षित खेती को लेकर रुचि बढ़ रही है.पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों और अन्य उद्यानिकी फसलों को शामिल करने से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिलते हैं.
वहीं संरक्षित खेती के जरिए मौसम के प्रतिकूल प्रभावों को कम करते हुए फसलों की बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन हासिल किया जा सकता है.आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अधिक लाभकारी कृषि मॉडल अपनाने में मदद कर रहा है.
अनारथ साय की सफलता यह भी बताती है कि यदि किसान शासन की योजनाओं और उपलब्ध तकनीकी सहायता का सही तरीके से उपयोग करें तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है. आधुनिक तकनीक, उद्यानिकी, संरक्षित खेती और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं.
ऐसे प्रयासों से किसानों को केवल उत्पादन बढ़ाने में ही मदद नहीं मिलती, बल्कि उन्हें कम लागत में अधिक आय और जोखिम कम करने का अवसर भी मिलता है.
जशपुर जैसे कृषि प्रधान जिले में अब खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है. किसान पारंपरिक फसलों के साथ आधुनिक तकनीकों और लाभकारी फसलों को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं. एकीकृत कृषि प्रणाली इस बदलाव को नई दिशा दे रही है.
अनारथ साय जैसे प्रगतिशील किसान न केवल खुद आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
जशपुर में उद्यानिकी और संरक्षित खेती का बढ़ता दायरा किसानों की आय में वृद्धि के साथ जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई पहचान दे रहा है. खेती में विविधता और उपलब्ध संसाधनों के समुचित उपयोग से किसान मौसम और बाजार से जुड़े जोखिमों को कम करते हुए आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं.
एकीकृत कृषि प्रणाली का यह मॉडल जशपुर के किसानों के लिए यह संदेश देता है कि खेती में बदलाव केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही योजना, विविधीकरण और आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को सालभर आय का मजबूत आधार बनाया जा सकता है.
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