धान की फसल पर मंडरा रहा कीट और रोगों का खतरा, समय रहते अपनाएं ये 4 जरुरी उपाय

धान की फसल पर मंडरा रहा कीट और रोगों का खतरा, समय रहते अपनाएं ये 4 जरुरी उपाय

खरीफ सीजन में धान की फसल तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसी समय कई कीट और रोग फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसे देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों के लिए जरूरी एडवाइजरी जारी की है.

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धान की फसल पर मंडरा रहा कीट और रोगों का खतरा, समय रहते अपनाएं ये 4 जरुरी उपायधान की खेती के लिए एडवाइजरी

धान की फसल इस समय तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसी दौर में कुछ कीट और रोग किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकते हैं. तना छेदक, हिस्पा और लीफ ब्लाइट जैसे कीट यदि समय रहते नियंत्रित नहीं किए गए, तो पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है. इसी खतरे को देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. कृषि विभाग ने फसल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी दवाओं, उनकी सही मात्रा और बचाव के आसान उपाय बताए हैं, ताकि किसान समय रहते ये 4 आसान उपाय अपनाकर अपनी धान की फसल को नुकसान से बचा सकें.

1. तना छेदक से ऐसे करें बचाव

कृषि विभाग के अनुसार तना छेदक धान का सबसे नुकसानदायक कीट है. यह पौधे के तने में घुसकर उसे अंदर से नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधे सूखने लगते हैं और उत्पादन कम हो जाता है. इसकी रोकथाम के लिए किसान 8–10 फेरेटेरा (क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल) दाने प्रति लीटर पानी की दर से घोल तैयार कर छिड़काव करें. साथ ही 75 प्रतिशत WP कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड की 1 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर भी फसल पर स्प्रे कर सकते हैं. समय पर छिड़काव करने से इस कीट पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.

2. धान में हिस्पा का नियंत्रण

हिस्पा या लीफ फोल्डर कीट धान की पत्तियों को मोड़कर अंदर से खाता है, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया भी कमजोर पड़ जाती है. कृषि विभाग ने सलाह दी है कि किसान इमामेक्टिन बेंजोएट 10 एसजी की 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 20 एससी की 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें. इससे इस कीट से धान की फसल को बचाया जा सकता है.

3. बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट से बचाव

इस महीने धान की फसल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट और लीफ स्ट्रिक रोग भी तेजी से फैल सकते हैं. इन रोगों के कारण पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे सूखने लगती हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ता है. ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेत में अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग न करें. वहीं, जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में ही खाद का उपयोग करें, ताकि रोग फैलने की संभावना कम हो.

4. जरूरत पड़ने पर करें रासायनिक उपचार

अगर फसलों में कीटों और रोग का प्रकोप अधिक दिखाई दे तो किसान रासायनिक दवाओं का भी छिड़काव कर सकते हैं. कृषि विभाग के अनुसार, स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 50 ग्राम और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत WP 2.5 किलोग्राम को 500 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में समान रूप से छिड़काव करें. इससे बैक्टीरियल रोगों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

समय पर निगरानी सबसे जरूरी

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान सप्ताह में कम से कम एक-दो बार अपने खेत का निरीक्षण जरूर करें. यदि किसी पौधे में कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उपचार करें. रोग या कीट बढ़ने का इंतजार करने से नुकसान अधिक हो सकता है. कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल बताई गई दवाओं का ही प्रयोग करें और दवा की सही मात्रा का पालन करें. समय पर सही प्रबंधन अपनाने से धान की फसल को कीट और रोगों से बचाया जा सकता है और अच्छी पैदावार ली जा सकती है. 

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