तमिलनाडु को 15 दिन मिलेगा पानी (फाइल फोटो)कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद फिर गहरा गया है. कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने मंगलवार को कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की सिफारिश को बरकरार रखते हुए कर्नाटक को 12 अगस्त की सुबह 8 बजे से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी अपने किसानों के हितों की रक्षा करना है, लेकिन उसे अदालत के आदेशों का पालन भी करना होगा. उन्होंने कहा कि राज्य में पानी की आवक और मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद सिंचाई मंत्री और अधिकारियों के साथ चर्चा कर आगे का फैसला लिया जाएगा.
कर्नाटक के अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता ने कहा कि सरकार CWMA के आदेश के खिलाफ उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों की समीक्षा कर रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है. ACS गौरव गुप्ता के मुताबिक, कावेरी से जुड़े एक मामले की सुप्रीम कोर्ट में 13 अगस्त को सुनवाई होनी है. राज्य को उम्मीद है कि उसके प्रस्तावित कदम और मौजूदा विवाद से जुड़े पहलुओं पर शीर्ष अदालत में सुनवाई हो सकती है.
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बुधवार को वरिष्ठ वकीलों, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक में CWMA के आदेश के खिलाफ राज्य की कानूनी रणनीति पर चर्चा की जाएगी.
कर्नाटक सरकार ने CWMA के सामने कहा कि उसके कावेरी बेसिन के चार प्रमुख जलाशयों में इस अवधि में केवल 77.746 टीएमसी पानी आया है. राज्य के मुताबिक यह 30 साल के औसत से करीब 47 प्रतिशत कम है और जलाशयों में पानी की आवक लगातार घट रही है.
कर्नाटक सरकार ने कहा कि कमजोर मॉनसून, घटती आवक और सीमित जल भंडारण को देखते हुए पेयजल, जरूरी इस्तेमाल और खरीफ खेती के लिए पानी सुरक्षित रखना जरूरी है. राज्य ने यह भी कहा कि बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पानी छोड़ना मुश्किल होगा.
कर्नाटक ने CWMA को बताया कि वह पहले ही बेलीगुंडलु में 86,942 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित कर चुका है, जबकि निर्धारित मात्रा 52,500 क्यूसेक थी. राज्य सरकार के अनुसार, इसके अलावा भी पानी रास्ते में है और आगे प्रवाह बढ़ने की संभावना है.
कर्नाटक ने कावेरी बेसिन में पानी की कमी की स्थिति में दोनों राज्यों के बीच समान और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित जल बंटवारे की मांग रखी. राज्य ने कहा कि केवल जलाशयों में आने वाले पानी के आधार पर पहले से तय अनुपात लागू करने से कर्नाटक पर अपेक्षाकृत अधिक दबाव पड़ सकता है.
वहीं, तमिलनाडु ने कर्नाटक की आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा कि बेंगलुरु की एक साल की पेयजल जरूरत को सबसे खराब स्थिति की आशंका के लिए सुरक्षित रखना तमिलनाडु के हिस्से के पानी को रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता.
तमिलनाडु सरकार ने कहा कि 1 जून से 10 अगस्त के बीच कृष्णराज सागर (KRS) के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बारिश की कमी केवल 9 प्रतिशत रही, जबकि काबिनी के ऊपरी क्षेत्र में यह कमी 19 प्रतिशत थी. वहीं, बेलीगुंडलु के नीचे कावेरी क्षेत्र में बारिश की कमी 36 प्रतिशत दर्ज की गई है.
CWMA के आदेश के बाद कर्नाटक के कावेरी क्षेत्र में किसानों और कन्नड़ संगठनों का विरोध शुरू हो गया. मंड्या में किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया और राज्य सरकार से तमिलनाडु के लिए अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ने की मांग की.
कई कन्नड़ संगठनों ने CWMA के आदेश के विरोध में 13 अगस्त को कर्नाटक बंद का आह्वान किया है. कन्नड़ चलावली वाटाल पक्ष के संयोजक वाटाल नागराज ने कहा कि संगठन किसी भी स्थिति में बंद करेगा और लोगों से इसमें समर्थन देने की अपील की.
मंड्या जिला किसान कल्याण संरक्षण समिति ने बुधवार को विश्वेश्वरैया की प्रतिमा के पास प्रदर्शन का ऐलान किया है. समिति ने किसानों, कन्नड़ संगठनों, श्रमिकों, महिलाओं और आम लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है.
किसान संगठनों ने राज्य सरकार से CWMA के निर्देश के बावजूद पानी नहीं छोड़ने की मांग की है. एक किसान नेता ने कहा कि कर्नाटक के किसानों के हितों की रक्षा जरूरी है और सरकार को राज्य की जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए. (पीटीआई)
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