Cow Urine: क‍िसान फसलों पर छ‍िड़क रहा गोमूत्र, म‍िट्टी में आए बदलाव से अध‍िकारी भी हैरान

Cow Urine: क‍िसान फसलों पर छ‍िड़क रहा गोमूत्र, म‍िट्टी में आए बदलाव से अध‍िकारी भी हैरान

झांसी के एक किसान ने तो गोमूत्र के माध्यम से खेती की एक नई विधि का प्रयोग अपने खेतों में किया है जिसके परिणाम भी चौकानेवाले मिले हैं. गोमूत्र के माध्यम से खेती करने पर जमीन की उर्वरा शक्ति में पहले के मुकाबले काफी बढ़ोतरी हुई है. मृदा रिपोर्ट में यह बदलाव देखकर अधिकारी भी हैरान है

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Cow Urine: क‍िसान फसलों पर छ‍िड़क रहा गोमूत्र, म‍िट्टी में आए बदलाव से अध‍िकारी भी हैरानगोमूत्र से खेती के बाद बदली मृदा रिपोर्ट

देश के किसान अब रासायनिक उर्वरक वाली खेती की बजाय प्राकृतिक विधि से खेती करने की तरफ बढ़ रहे हैं. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार भी गौ आधारित प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. असल में रासायनिक उर्वरकों के लगातार बढ़ते प्रयोग के चलते धरती की उर्वरा शक्ति पर काफी असर पड़ा है. वहीं दूसरी तरफ इससे फसल लागत भी बढ़ी है, जबकि प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों की फसल लागत कम होती है तो वहीं दूसरी तरफ उनका मुनाफा भी बढ़ जाता है. इस बीच झांसी के एक किसान ने फसलों में गोमूत्र (Cow urine) का प्रयोग कर एक मॉडल स्थाप‍ित क‍िया है. 

झांसी के क‍िसान धर्मेंद नामदेव ने फसलों में गोमूत्र का छ‍िड़काव क‍िया, इससे जमीन की उर्वरा शक्ति पहले के मुकाबले काफी बढ़ोतरी हुई है. मृदा रिपोर्ट में यह बदलाव देखकर अधिकारी भी हैरान है. गोमूत्र के माध्यम से खेती करने के बाद जमीन में जीवित कार्बन, नाइट्रोजन ,पोटेशियम ,फॉस्फोरस, जिंक, बोरान, सल्फर की मात्रा में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

गोमूत्र के उपयोग से बढ़ी जमीन की उर्वरा शक्ति

झांसी जनपद के चिरगांव के रहने वाले किसान धर्मेंद्र नामदेव ने रासायनिक शेती को छोड़कर अब गोमूत्र (Cow urine) आधारित खेती कर रहे हैं. बीते 5 सालों में उन्हें इस खेती में कई चौकाने वाले परिणाम मिले हैं. हालांक‍ि उनका उत्पादन ज्यादा नहीं हुआ है, लेक‍िन उनकी फसल लागत में काफी कमी आई है. सबसे बड़ा परिणाम तो उनकी जमीन की उर्वरा शक्ति पर पड़ा है. किसान तक से बातचीत में उन्होंने बताया कि जब वह रासायनिक खेती करते थे तो उस दौरान उन्होंने अपनी जमीन की मृदा जांच कराई थी, जिसमें चौकाने वाले परिणाम देखने को मिले. अब उनकी इस खेती के तरीकों को देखकर दूसरे किसान भी आगे आ रहे हैं. वे  प्रति बीघा 45 लीटर गोमूत्र का उपयोग करते हैं, जिसके चलते उनकी फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ा है. उनकी उपज में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा है और स्वाद भी काफी अच्छा है.  

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गोमूत्र से खेती के बाद मृदा का स्वास्थ 

गौमूत्र के उपयोग से पहले जमीन के पोषक तत्व उपयोग के बाद
 PH 7.9                                  7.5
जीवित कार्बन 42%  4.5
नाइट्रोजन 168 191
 फास्फोरस 4.5   9
पोटेशियम 8.5 22
सल्फर 15.80 24.54

 गौमूत्र से खेती के फायदे

 केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक सुशील शुक्ला का कहना है कि रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों की बढ़ती प्रयोग से धरती बीमार हो रही है. मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या कम हो रही है. गौमूत्र के माध्यम से खराब भूमि को ठीक किया जा सकता है. भारतीय नस्ल की देसी गाय के गोमूत्र के प्रयोग से खेती करने पर जमीन की उर्वरा शक्ति में भी काफी फायदा होता है. गौमूत्र के प्रयोग से खराब भूमि ठीक हो जाती है, यहां तक कि सिंचाई के लिए पानी भी कम लगता है. जमीन की वर्षा का जल सोखने व रोकने की क्षमता बढ़ जाती है. 

गौमूत्र में पाए वाले प्रमुख तत्व

देसी नस्ल की गाय के गौमूत्र में नाइट्रोजन, गंधक अमोनिया, कापर, यूरिया ,यूरिक एसिड, फास्फेट, सोडियम, पोटेशियम , मैग्निज, कर्बोलिक एसिड  जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं.   इसके अतिरिक्त लवण  विटामिन ए ,विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन डी और ई के  साथ-साथ हिप्युरिक एसिड , क्रिएटनीन और स्वर्ण क्षार भी पाए जाते हैं.

 

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