कोप्टर्स तकनीक 95 फीसदी घटा देगी कॉफी पल्पिंग में पानी की खपत, खराब पानी शुद्ध करने की खूबी से खेती में होगा लाभ

कोप्टर्स तकनीक 95 फीसदी घटा देगी कॉफी पल्पिंग में पानी की खपत, खराब पानी शुद्ध करने की खूबी से खेती में होगा लाभ

डॉक्टर राजाह विजय कुमार ने कहा कि की पहला कोप्टर्स (COPTERS) सिस्टम 2023-24 की फसल के मौसम में कर्नाटक के कोडगु जिले की बगवती एस्टेट मडापुर में लगाया गया है. साल 2025 के मध्य तक इसे बाजार में बिक्री के लिए लाया जाएगा.

Advertisement
कोप्टर्स तकनीक 95 फीसदी घटा देगी कॉफी पल्पिंग में पानी की खपत, खराब पानी शुद्ध करने की खूबी से खेती में होगा लाभकॉफ्टर्स सिस्टम कॉफी पल्पिंग में पानी की खपत घटा देता है.

कॉफी पल्पिंग यानी गूदा निकालने की प्रक्रिया में भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल होता है. पानी की खपत कम करने के लिए डी स्केलेन फाउंडेशन ने कोप्टर्स (COPTERS) सिस्टम बनाया है, जो 95 फीसदी से अधिक पानी की खपत को कम कर देता है. इसके अलावा पल्पिंग में यूज किए जा चुके पानी को फिर से शुद्ध करके उसे इस्तेमाल करने लायक बनाने में सक्षम है. इसके अलावा इसके इस्तेमाल से जैव पोषक तत्व भी बनेंगे जिनका इस्तेमाल कॉफी की खेती में किया जा सकेगा. 

डी स्केलीन फाउंडेशन के समूह चेयरमैन डॉक्टर राजाह विजय कुमार ने कहा कि उनकी टीम ने कोप्टर्स (COPTERS) सिस्टम को विकसित किया है. यह कॉफी पल्पिंग वॉटर रिकवरी सिस्टम (COPTERS) एक उन्नत तकनीक है, जिसे स्केलीन कॉफी रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (SCRO) ने कॉफी उत्पादन में पानी खपत को सुधारने के लिए विकसित किया है. यह कॉफी पल्पिंग प्रक्रिया में पानी की खपत को लगभग 20,000 लीटर प्रति किलोग्राम कॉफी प्रॉसेसिंग से घटाकर केवल 250-300 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम तक ले आता है. उन्होंने कहा कि COPTRES यह उपलब्धि फाइन पार्टिकल शॉर्टवेव डिसोसिएशन तकनीक के माध्यम से हासिल करता है, जो खराब पानी को तत्वीय स्तर पर शुद्ध करके पानी को फिर से इस्तेमाल करने लाया बनाता है. 

कर्नाटक के बगवती एस्टेट में कोप्टर्स सिस्टम लगा 

डॉक्टर राजाह विजय कुमार ने कहा कि की पहला कोप्टर्स (COPTERS) सिस्टम 2023-24 की फसल के मौसम में भारत के कर्नाटक राज्य के कोडगु जिले में स्थित बगवती एस्टेट मडापुर में लगाया गया है. साल 2025 के मध्य तक इसे बाजार में बिक्री के लिए लाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हर प्रोजेक्ट के लिए कार्यान्वयन की अवधि 6 से 9 महीने के बीच होगी. इसकी कीमत एस्टेट के आकार, परियोजना के पैमाने, और विशेष संचालन जरूरतों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. 

COPTERS System

कॉफी की खेती और किसानों को फायदा  

  1. कोप्टर्स (COPTERS) का उद्देश्य उन कॉफी उत्पादकों के लिए है, जो गीली प्रक्रिया के माध्यम से हाई क्वालिटी वाले पर्चमेंट का उत्पादन करते हैं.
  2. इसके इस्तेमाल से किसान आर्थिक रूप से लाभान्वित होते हैं क्योंकि वे पानी का दोबार इस्तेमाल पल्पिंग के लिए कर सकते हैं. कोप्टर्स सिस्टम से पैदा होने वाले जैव पोषक तत्वों का उपयोग खेती में भी किया जा सकता है. इसके अलावा किसानों को कार्बन क्रेडिट और पानी के क्रेडिट के विकल्प भी मिलते हैं, जो उनके लाभ को और बढ़ाते हैं.
  3. काफी किसानों और इंडस्ट्री के लोगों को कोप्टर्स के जरिए पानी की बर्बादी और लागत कम होगी. इसके अलावा यूज किया जा चुका पानी फिर से शुद्ध किया जा सकेगा.
  4. खेती में जल की उपयोगिता सुनिश्चित होगी और जल संकट का समाधान करने में मदद मिलेगी. 
  5. हाई क्वालिटी वाले जैव पोषक तत्वों का उत्पादन हो सकेगा, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, पौधों के विकास और अधिक उपज में सहायक होते हैं.
  6. कॉफी खेती की इनपुट लागत कम करके और उपज की गुणवत्ता बढ़ाकर किसानों की आय को तीन गुना तक बढ़ाने में मदद की जा सकेगी. 

कोप्टर्स के इस्तेमाल से कितना पानी बचेगा 

कोप्टर्स (COPTERS) के बिना पारंपरिक कॉफी पल्पिंग में प्रति किलोग्राम कॉफी के लिए लगभग 20,000 लीटर पानी की जरूरत होती है. कोप्टर्स के साथ पानी की खपत घटकर सिर्फ 250-300 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम रह जाती है. उदाहरण से समझिए - 
1,000 किलोग्राम कॉफी पलपिंग के लिए:

  • कोप्टर्स के बिना: 20,000 लीटर × 1,000 किग्रा = 20,000,000 लीटर पानी की जरूरत.
  • कोप्टर्सके साथ: 0.3 लीटर × 1,000 किग्रा = 300 लीटर पानी की जरूरत.
  • पानी की बचत: 20,000,000 लीटर - 300 लीटर = 19,999,700 लीटर पानी बचाया गया.
  • दावा किया गया है कि कॉफ्टर्स कॉफी पल्पिंग के दौरान 99 फीसदी तक पानी की बचत कर रहा है.

ये भी पढ़ें - 

POST A COMMENT