
बदलते मौसम, बढ़ती उत्पादन लागत और पारंपरिक खेती की चुनौतियों के बीच आधुनिक कृषि तकनीक किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है. मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के नटेरन विकासखंड की ग्राम पंचायत नानकपुर के प्रगतिशील किसान उपदेश शर्मा ने रेज्ड बेड प्लांटर तकनीक अपनाकर सोयाबीन की खेती में शानदार सफलता हासिल की है.इस तकनीक से उन्होंने न केवल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की, बल्कि महज 3 बीघा क्षेत्र में लगभग ₹1 लाख का शुद्ध मुनाफा भी अर्जित किया. उनकी सफलता अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है.
सोयाबीन मध्य प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके रकबे और उत्पादकता में गिरावट देखी गई है. पारंपरिक खेती में अधिक बीज, अधिक लागत, खरपतवार और कीटों का प्रकोप तथा मौसम की मार किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनते हैं.
उपदेश शर्मा पहले सामान्य पद्धति से सोयाबीन की खेती करते थे. इस पद्धति में उत्पादन मुश्किल से 2 से 3 क्विंटल प्रति बीघा तक ही पहुंच पाता था. अधिक या कम बारिश होने पर फसल को नुकसान होता था और कीटनाशक व खरपतवारनाशक पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था.
खरीफ वर्ष 2025 में उन्होंने पहली बार रेज्ड बेड प्लांटर तकनीक से सोयाबीन की बुवाई की. इस तकनीक में खेत को ऊंची क्यारियों (Raised Beds) के रूप में तैयार किया जाता है, जिससे जल निकास बेहतर रहता है, पौधों की जड़ों का विकास अच्छा होता है और फसल पर प्रतिकूल मौसम का प्रभाव कम पड़ता है.
इस तकनीक का परिणाम यह रहा कि उत्पादन बढ़कर करीब 8 क्विंटल प्रति बीघा तक पहुंच गया. साथ ही फसल में कीट और खरपतवार का प्रकोप भी काफी कम रहा.
उपदेश शर्मा ने बताया कि कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना के अधिकारियों के मार्गदर्शन से उन्हें नई तकनीक अपनाने का अवसर मिला.आत्मा परियोजना की अधिकारी तुलसा और विकासखंड तकनीकी प्रबंधक नरेंद्र सिंह रघुवंशी ने गांव में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को रेज्ड बेड प्लांटर तकनीक की जानकारी दी.
इसी दौरान उनके खेत में प्रदर्शन प्लॉट तैयार किया गया, जहां वैज्ञानिक तरीके से बीज और उर्वरक प्रबंधन किया गया. इसका सीधा लाभ फसल की बेहतर बढ़वार और अधिक उत्पादन के रूप में मिला.
उपदेश शर्मा ने केवल 8 किलोग्राम बीज प्रति बीघा की दर से 3 बीघा में कुल 24 किलोग्राम जेएस-2172 किस्म के बीज की बुवाई की. खेत में गोबर खाद का उपयोग किया गया और अतिरिक्त रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं पड़ी. फसल में कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों पर भी बहुत कम खर्च आया.
कटाई और बिक्री के बाद उन्हें लगभग ₹1 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जिससे यह तकनीक उनके लिए बेहद लाभकारी साबित हुई.
अपनी सफलता से उत्साहित उपदेश शर्मा ने खरीफ वर्ष 2026 में 2.6 हेक्टेयर (करीब 13 बीघा) क्षेत्र में रेज्ड बेड फरो तकनीक से सोयाबीन की खेती करने का लक्ष्य तय किया है. उनका मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं.
उपदेश शर्मा की सफलता से क्षेत्र के कई किसान आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं. यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि वैज्ञानिक सलाह, तकनीकी मार्गदर्शन और नवाचार को अपनाकर खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today