
नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) ने एक हाईटेक पोर्टल बनाया है. ये प्लेटफार्म खरीदारी से जुड़ा हुआ है. इस पर किसान और खरीदार दोनों साथ होंगे. इतना ही नहीं खरीदारी को सुराक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नेफेड इस प्लेटफार्म पर 4 बड़ी सुविधाएं भी दे रहा है. इस प्लेटफार्म का नाम एफएम कास (FMCAS) है. इस प्लेटफार्म को एफपीओ से जुड़े किसानों और हर स्तर पर उनके एग्री प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने वाले हर छोटे-बड़े कारोबारियों की जरूरत के हिसाब से बनाया गया है.
इस बात की घोषणा नेफेड के चेयरमैन अशोक ठाकुर ने की है. बड़ी संख्या में इस पर एफपीओ को जोड़ा गया है. यहां पर एफपीओ न सिर्फ अपना प्रोडक्ट बेचेंगे बल्कि खरीदारी भी कर सकेंगे. गौरतलब रहे पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) लम्बे वक्त से इसी तरह के एक प्लेटफार्म की डिमांड कर रहा था, जिससे जो पोल्ट्री फार्मर को सस्ता फीड खरीदने में आसानी हो.
चेयरमैन अशोक ठाकुर ने किसान तक को बताया कि एफपीओ अपना प्रोडक्ट जैसे दाल, मक्का, चावल आदि प्लेटफार्म पर नीलामी के लिए रखेंगे. उसके दाम तय कर देंगे. इसकी सूचना एफएम कास पर रजिस्टर्ड खरीदारों के पास चली जाएगी. उन्हें वक्त रहते ये पता चल जाएगा कि मक्का या चावल इस दाम पर बिकने आया है. तो जो खरीदार है उसे जिस दाम पर जो प्रोडक्ट अच्छा लगेगा वो खरीद लेगा. सौदा होते ही इसकी सूचना रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्टस के पास चली जाएगी. वो एफपीओ और खरीदार के सामने अपने रेट रख देगा. जिसके रेट कम होंगे उसे ढुलाई की जिम्मेदारी मिल जाएगी.
माल लोड होते ही उसका इंश्योरेंस भी हो जाएगा. वहीं माल का पेमेंट एक जगह आ जाएगा. जैसे ही माल की डिलेवरी रिपोर्ट अपडेट होगी तो फौरन ही पेमेंट एफपीओ के खाते में चला जाएगा. अगर माल खरीदने वाले को माल में कोई शिकायत आती है तो एक सर्वेयर कमेटी उसका निरीक्षण करेगी. इसकी रिपोर्ट क्लाउड पर नेफेड को मिल जाएगी. कहीं भी किसी के साथ कोई फ्रॉड नहीं होने दिया जाएगा.
पीएफआई के प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा ने किसान तक को बताया कि नेफेड के सामने हमने भी अपनी बात रखी थी. एफएम कास पर पोल्ट्री फार्मर और फीड निर्माता भी रजिस्टर्ड होंगे. इसका बड़ा फायदा ये होगा कि हमे एक ही जगह पर जरूरत के मुताबिक मक्का और सोया मिल जाएगी. हमे मक्का और सोया कैसी चाहिए ये बात भी हम प्लेटफार्म पर रख सकेंगे. वहीं एक और ये बात रखी गई कि किसानों को मक्का की अच्छी किस्म उपलब्ध कराई जाएं जिससे मक्का की पैदावार बढ़ सके.
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