किसानों की खेती होगी मौसम के हिसाब से स्मार्ट, NABARD-IMD ने मिलाया हाथ

किसानों की खेती होगी मौसम के हिसाब से स्मार्ट, NABARD-IMD ने मिलाया हाथ

NABARD और IMD ने किसानों तक मौसम की सटीक और उपयोगी जानकारी पहुंचाने के लिए समझौता किया है. अब DiCRA प्लेटफॉर्म पर जिला और ब्लॉक स्तर के मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और मौसम अलर्ट मिलेंगे. मिट्टी की नमी, फसल की स्थिति और जलवायु जोखिम की जानकारी भी साथ मिलेगी, जिससे किसान समय पर खेती से जुड़े सही फैसले ले सकेंगे.

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किसानों की खेती होगी मौसम के हिसाब से स्मार्ट, NABARD-IMD ने मिलाया हाथNABARD-IMD ने शुरू की नई डिजिटल पहल

खेती में मौसम की जानकारी बहुत अहम होती है. बारिश कब होगी, तापमान कितना रहेगा या तेज बारिश और खराब मौसम का खतरा कब है, इसकी सही जानकारी किसानों को समय पर मिल जाए तो वे फसल को होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा सकते हैं. इसी दिशा में अब नाबार्ड (NABARD) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाथ मिलाया है. दोनों संस्थानों ने किसानों तक मौसम और खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारी पहुंचाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

किसानों को एक जगह मिलेगी मौसम और खेती की जानकारी

इस समझौते के तहत IMD अपनी कृषि-मौसम संबंधी जानकारी को DiCRA (Data in Climate Resilient Agriculture) डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ेगा. DiCRA एक ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और NABARD का सहयोग मिल रहा है. इसका मकसद जलवायु और मौसम से जुड़ी जानकारी को आसान तरीके से किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचाना है. अब इस प्लेटफॉर्म पर किसानों को मौसम की ऐसी जानकारी मिल सकेगी, जिसका इस्तेमाल वे खेती से जुड़े फैसले लेने में कर सकेंगे. इसमें जिले और ब्लॉक स्तर के मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम सलाह, मौसम केंद्रों से मिलने वाली जानकारी और मौसम से जुड़े अलर्ट शामिल होंगे.

ब्लॉक स्तर तक पहुंचेगी मौसम की जानकारी

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि मौसम की जानकारी केवल राज्य या जिले तक सीमित नहीं रहेगी. इसे जिला और ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी. यानी किसान अपने इलाके के मौसम को ध्यान में रखते हुए खेती की तैयारी कर सकेंगे. उदाहरण के लिए, अगर किसी इलाके में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की संभावना है, तो किसान समय रहते खेत से पानी निकालने, फसल की सुरक्षा करने या जरूरी कृषि कार्य को आगे-पीछे करने का फैसला ले सकते हैं. इसी तरह बारिश की कमी या तापमान बढ़ने की स्थिति में भी किसान अपनी फसल के लिए बेहतर तैयारी कर पाएंगे.

मौसम के साथ फसल और मिट्टी की जानकारी भी मिलेगी

DiCRA पर केवल मौसम का पूर्वानुमान ही नहीं होगा. इस प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद मिट्टी में नमी, वनस्पति की स्थिति, फसल की हालत और जलवायु जोखिम से जुड़ा डेटा भी उपलब्ध है. IMD की मौसम संबंधी जानकारी जुड़ने के बाद इन सभी जानकारियों को एक साथ देखकर खेती से जुड़े फैसले लेना आसान होगा. इसका मतलब है कि किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े अधिकारी यह समझ सकेंगे कि किसी इलाके में मौसम का फसल पर क्या असर पड़ सकता है और वहां किस तरह की तैयारी की जरूरत है.

बैंक और किसानों दोनों के लिए उपयोगी होगी जानकारी

इस समझौते का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. NABARD के मुताबिक, मौसम और जलवायु से जुड़ी जानकारी बैंकों, नीति बनाने वालों, शोधकर्ताओं और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों के लिए भी उपलब्ध होगी. इससे बैंकों को भी मौसम से जुड़े जोखिम को समझने में मदद मिल सकती है. किसी इलाके में बार-बार सूखा, बाढ़ या दूसरी मौसम संबंधी समस्या होती है तो वहां कृषि और किसानों से जुड़े वित्तीय फैसले लेते समय इस जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

मौसम की जानकारी को कार्रवाई से जोड़ना है मकसद

NABARD के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि जलवायु जोखिम को केवल अलग समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसे विकास और वित्तीय फैसलों का हिस्सा बनाना जरूरी है. उनके मुताबिक, मौसम की जानकारी पहले से उपलब्ध है, लेकिन सबसे जरूरी यह है कि इस जानकारी को आसान बनाकर सही समय पर कार्रवाई में बदला जाए. आसान भाषा में कहें तो सिर्फ यह जानना काफी नहीं है कि बारिश होगी या गर्मी बढ़ेगी. किसान को यह भी पता होना चाहिए कि ऐसे मौसम में उसे अपनी फसल के लिए क्या करना चाहिए. DiCRA और IMD की साझेदारी इसी दिशा में काम करेगी.

IMD की मौसम भविष्यवाणी में भी हुआ सुधार

IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि पिछले करीब एक दशक में भारत में मौसम की भविष्यवाणी की सटीकता में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक सुधार हुआ है. अब मौसम का पूर्वानुमान पंचायत स्तर तक पहुंच रहा है. हालांकि, अगली बड़ी चुनौती यह है कि यह जानकारी देश के हर किसान तक सही समय पर और ऐसी भाषा में पहुंचे, जिसे वह आसानी से समझ सके. NABARD और IMD का यह सहयोग इसी 'लास्ट माइल' यानी अंतिम स्तर तक जानकारी पहुंचाने की कोशिश है.

मोबाइल और वेब पोर्टल से मिलेगी जानकारी

NABARD, DiCRA के ओपन एपीआई और डेटा सिस्टम की मदद से IMD की मौसम संबंधी जानकारी को किसानों और दूसरे उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाएगा. यह जानकारी DiCRA के वेब पोर्टल, मोबाइल इंटरफेस और API के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी. इसके जरिए जिला स्तर की कृषि सलाह, मौसम के आधार पर जोखिम की जानकारी और मौसमी अलर्ट भी साझा किए जाएंगे. NABARD का DiCRA में एक अलग Weather Portal भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें IMD के डेटा को शामिल किया जाएगा.

किसानों को समय पर सही फैसला लेने में मिलेगी मदद

खेती में मौसम का सीधा असर फसल की पैदावार और किसान की कमाई पर पड़ता है. ऐसे में मौसम की सही जानकारी अगर समय पर मिल जाए तो किसान सिंचाई, बुवाई, कटाई, खाद और दूसरी कृषि गतिविधियों की बेहतर योजना बना सकता है. NABARD और IMD की यह साझेदारी इसी जानकारी को किसानों के लिए ज्यादा उपयोगी और आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम है. इससे देश में जलवायु के अनुकूल और जोखिम कम करने वाली खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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