
छत्तीसगढ़ में खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से ड्रोन स्प्रेयर की सुविधा मिलेगी. इसकी शुरुआत बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की पांच प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से की गई है, जहां फिलहाल 11 कृषि ड्रोन तैनात किए गए हैं. इस योजना का शुभारंभ राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने नवीन कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में किया.
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने खेतों में ड्रोन के जरिए उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव का लाइव प्रदर्शन किया. हल्की बारिश के बीच हुए इस प्रदर्शन में दिखाया गया कि कैसे ड्रोन कम समय में बड़े क्षेत्र में सटीक तरीके से छिड़काव कर सकता है. इससे रसायनों का संतुलित उपयोग होगा, फसल को कम नुकसान पहुंचेगा और किसानों की लागत में भी कमी आएगी.
सहकारिता विभाग ने चालू खरीफ सीजन में 50 हजार एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से खाद और कीटनाशकों के छिड़काव का लक्ष्य तय किया है. फिलहाल यह सुविधा बलौदाबाजार, कसडोल, बया, गिर्रा (पलारी) और दामाखेड़ा (सिमगा) की सहकारी समितियों में उपलब्ध होगी.
योजना के तहत किसानों को अपनी संबंधित समिति में जाकर खेत का रकबा और छिड़काव की तारीख दर्ज करानी होगी. तय तिथि पर प्रशिक्षित ड्रोन पायलट ड्रोन लेकर किसान के खेत तक पहुंचेगा. किसान को केवल खाद या कीटनाशक उपलब्ध कराना होगा और प्रति एकड़ निर्धारित सेवा शुल्क देना होगा.
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि ड्रोन तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्र में छिड़काव संभव होगा.इससे किसानों का श्रम कम होगा, लागत घटेगी और खेत में बार-बार जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. उन्होंने कहा कि यह पहल जिले के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
उन्होंने यह भी बताया कि 'ड्रोन दीदी' योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
मंत्री ने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने की अपील की. उनका कहना था कि जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है और बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पादन प्राप्त होता है.
कार्यक्रम में जिला प्रशासन ने बताया कि जिले की सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां अब पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हो चुकी हैं. ये समितियां कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और मिनी बैंक के रूप में भी काम कर रही हैं. यहां माइक्रो एटीएम की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को छोटी राशि निकालने के लिए बड़े बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
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