
लीची की नई तकनीक से किसानों को फायदाविश्व प्रसिद्ध शाही लीची का सीजन शुरू हो चुका है और इस बार किसानों के लिए अच्छी खबर है. नई वैज्ञानिक तकनीक के सहारे अब लीची की क्वालिटी और उत्पादन दोनों बढ़ाए जा सकते हैं. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार दास ने किसानों को अप्रैल महीने में लीची के फलों पर “नॉन-वॉवेन कवरिंग बैग” लगाने की सलाह दी है. उनका कहना है कि इससे फल को सनबर्न, कीटों और अन्य नुकसान से बचाया जा सकता है.
डॉ. दास ने बताया, “फल लगने के 25-30 दिन बाद यानी अप्रैल में लीची के गुच्छों पर विशेष बैग लगा देना चाहिए. ये बैग तुड़ाई तक लगे रहते हैं, जिससे फल पूरी तरह सुरक्षित रहता है और उसकी क्वालिटी बेहतर होती है.”
मुजफ्फरपुर में पहली बार इस तकनीक का ट्रायल आत्मा और राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुशहरी की पहल पर शुरू किया गया है. इस तकनीक में लीची के फलों को विशेष नॉन-वॉवेन बैग से कवर किया जाता है, जो उन्हें बाहरी नुकसान से बचाता है. बैग लगाने का सही समय अप्रैल माना गया है, जब फल विकसित हो रहे होते हैं. ये बैग मई के तीसरे सप्ताह तक लगे रहते हैं, जिससे फल सुरक्षित और आकर्षक बनता है.
इस “कवच तकनीक” के कई फायदे सामने आए हैं. जैसे तेज धूप से होने वाले सनबर्न से बचाव, फ्रूट बोरर जैसे कीटों से सुरक्षा, फल फटने की समस्या में कमी और प्राकृतिक लाल रंग और आकार में सुधार. इस तकनीक से लीची के फल की मिठास में वृद्धि होती है. इन सभी कारणों से बाजार में लीची की मांग और कीमत दोनों बढ़ने की संभावना है.

बेहतर ग्रेडिंग और प्रीमियम क्वालिटी के कारण किसानों को प्रति किलो ज्यादा दाम मिल सकता है. एक कठ्ठा बागान में करीब 150 बैग की जरूरत होती है. एक बैग की कीमत लगभग 10 रुपये है और इसे दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिससे लागत कम रहती है.
किसानों को इस तकनीक की जानकारी देने के लिए अप्रैल के तीसरे सप्ताह में बागानों में लाइव डेमो आयोजित किया जाएगा. वैज्ञानिक खुद खेतों में पहुंचकर बैग लगाने की सही विधि सिखाएंगे. परियोजना के पहले चरण में 20 हजार नॉन-वॉवेन बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इन्हें “लीची पाठशाला” से जुड़े 676 किसानों के बीच बांटा जाएगा, जहां हर किसान को 30 बैग दिए जाएंगे. अब तक 26 लीची पाठशालाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती की ट्रेनिंग दी जा चुकी है.
मुजफ्फरपुर की पहचान रही शाही लीची अब नई तकनीक के सहारे और बेहतर क्वालिटी के साथ बाजार में उतरने जा रही है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में मुजफ्फरपुर लीची की मांग और मजबूत होगी.
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