ग्राफ्टेड बैंगन की खेती UP के किसानों के लिए बनेगी बड़ी गेम चेंजर, IIVR के वैज्ञानिकों ने दिए ये टिप्स

ग्राफ्टेड बैंगन की खेती UP के किसानों के लिए बनेगी बड़ी गेम चेंजर, IIVR के वैज्ञानिकों ने दिए ये टिप्स

grafted Brinjal Farming: डॉ. बहादुर ने किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के चयन, रोपण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और नियमित निगरानी के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने विशेष रूप से बताया कि पौध रोपण के समय ग्राफ्ट यूनियन (जोड़) मिट्टी के संपर्क में नहीं आना चाहिए, ताकि पौधों की रोग सहनशीलता का पूरा लाभ मिल सके.

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ग्राफ्टेड बैंगन की खेती UP के किसानों के लिए बनेगी बड़ी गेम चेंजर, IIVR के वैज्ञानिकों ने दिए ये टिप्स2200 ग्राफ्टेड बैंगन पौधों का किया गया वितरण

उत्तर प्रदेश के किसानों को वैज्ञानिक तरीके से बैंगन की खेती करने के लिए जागरुक किया जा रहा है. इसी क्रम में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी द्वारा चंदौली में किसानों को 2200 ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे वितरित किए गए. एकीकृत बागवानी विकास मिशन परियोजना के विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत बहादुर ने बताया कि किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक सब्जी उत्पादन तकनीकों से जोड़ा जा रहा है. इसका लक्ष्य फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि करना तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने का है. 

2200 ग्राफ्टेड बैंगन पौधों का वितरण

उन्होंने बताया कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) परियोजना के अंतर्गत किसान गोष्ठी एवं ग्राफ्टेड पौध वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में लगभग 36 किसानों ने भाग लिया. इस दौरान किसानों को 2200 ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे वितरित किए गए.  

चंदौली में किसानों को 2200 ग्राफ्टेड बैंगन पौधों का किया गया वितरण
चंदौली में किसानों को 2200 ग्राफ्टेड बैंगन पौधों का किया गया वितरण

डॉ. अनंत बहादुर के मुताबिक, ग्राफ्टिंग तकनीक को आधुनिक और टिकाऊ सब्जी उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि यह तकनीक पौधों को मिट्टी जनित रोगों और प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील बनाती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार होता है और लागत कम करने में भी मदद मिलती है.

ग्राफ्टेड पौध तकनीक को अपनाने की अपील

डॉ. बहादुर ने किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के चयन, रोपण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और नियमित निगरानी के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने विशेष रूप से बताया कि पौध रोपण के समय ग्राफ्ट यूनियन (जोड़) मिट्टी के संपर्क में नहीं आना चाहिए, ताकि पौधों की रोग सहनशीलता का पूरा लाभ मिल सके. अंत में, डॉ. अनंत बहादुर ने किसानों से ग्राफ्टेड पौध तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने और इसके लाभों को अन्य किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया. 

6 से 8 महीने तक देगा उत्पादन

संस्थान के निदेशक राजेश कुमार के अनुसार,  ग्राफ्टेड बैंगन की फसल 45 दिनों में पहली तुड़ाई देने लगती है. इसके बाद हर सप्ताह दो बार तुड़ाई की जा सकती है. उचित पोषण और देखभाल मिलने पर यह फसल 6 से 8 महीने तक लगातार उत्पादन देती रहती है. इस अवसर पर शोधकर्ता अनीष कुमार सिंह ने ग्राफ्टिंग की वैज्ञानिक विधि, पौधों की देखभाल और व्यावसायिक सब्जी उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की. 

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