अल नीनो और आईओडी पर अपडेट (AI Image)प्रशांत महासागर में अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और आने वाले महीनों में इसके और ताकतवर होने के संकेत हैं. ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी (BoM) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो की मौजूदा स्थिति काफी मजबूत है. इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर असर पड़ सकता है. 30 अगस्त को खत्म हुए हफ्ते में रिलेटिव नीनो 3.4 इंडेक्स +2.45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. यह अल नीनो की तय सीमा +0.80 डिग्री सेल्सियस से काफी ज्यादा है. जलवायु मॉडल बता रहे हैं कि दक्षिणी गोलार्ध के वसंत के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान और बढ़ सकता है. इसका असर देर वसंत या गर्मियों में सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है.
बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BoM का कहना है कि अल नीनो की मौजूदा ताकत को देखते हुए इसका असर लंबे समय तक रह सकता है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यह स्थिति मार्च 2027 तक बनी रह सकती है. मौजूदा गर्माहट इतनी ज्यादा है कि आने वाले महीनों में समुद्री तापमान पुराने रिकॉर्ड स्तरों को भी चुनौती दे सकता है.
BoM के मुताबिक, हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है. 30 अगस्त को IOD इंडेक्स +0.22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. इससे पहले लगातार तीन हफ्ते तक यह पॉजिटिव IOD की लिमिट +0.4 डिग्री सेल्सियस से ऊपर था.
जलवायु मॉडल सितंबर से नवंबर के दौरान सकारात्मक IOD बनने की संभावना जता रहे हैं. हालांकि, नए मॉडल अनुमानों में इसके पहले के मुकाबले कम मजबूत रहने के संकेत हैं. फिर भी हिंद महासागर की स्थिति में संभावित बदलाव भारत के मौसम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी अपने ताजा मासिक आउटलुक में कहा है कि फिलहाल हिंद महासागर में तटस्थ IOD की स्थिति बनी हुई है. मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुसार, सितंबर 2026 तक तटस्थ स्थिति बने रहने की संभावना है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों के पूर्वानुमान सितंबर के बाद IOD के सकारात्मक चरण में जाने की संभावना दिखा रहे हैं.
अल नीनो और IOD दोनों ही भारत के मौसम और मॉनसूनी गतिविधियों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण जलवायु कारक हैं. मजबूत अल नीनो भारतीय मौसम प्रणाली पर असर डाल सकता है. वहीं, सकारात्मक IOD कुछ परिस्थितियों में इसके प्रभाव को कम करने या मौसम के समीकरण को बदलने में भूमिका निभा सकता है. इसलिए आने वाले दिनों में हिंद महासागर की स्थिति और IOD में होने वाले बदलाव पर कई मौसम एजेंसियों की खास नजर रहेगी.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today