'फर्स्ट फ्लश' चायदार्जिलिंग के चाय उद्योग को इस साल बड़ी राहत मिली है. दरअसल, पहाड़ी इलाकों के ज्यादातर चाय बागानों में इस बार मौसम अच्छा रहने की वजह से प्रीमियम फर्स्ट फ्लश चाय का उत्पादन पिछले दो सालों के मुकाबले ज्यादा हुआ है. पिछले दो वर्षों में लंबे सूखे के कारण पहली फसल वाली महंगी और खास चाय की पैदावार काफी प्रभावित हुई थी. लेकिन इस बार समय पर मौसम अनुकूल रहने से चाय की फसल बेहतर हुई है. ऐसे में अनुमान है कि इस साल कुल उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (ITEA) के अध्यक्ष अंशुमन कनोरिया ने कहा कि इस साल दार्जिलिंग की पहली चाय की फसल पिछले दो सालों की तुलना में काफी बेहतर रही है. उनके मुताबिक, पिछले दो साल मौसम खराब होने की वजह से चाय उत्पादन के लिए बहुत मुश्किल रहे, लेकिन इस बार मौसम ने साथ दिया, जिससे फसल अच्छी हुई है. दार्जिलिंग की ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय दुनिया की सबसे महंगी और खास चायों में गिनी जाती है. यह साल की पहली फसल होती है और पूरे साल के कुल चाय उत्पादन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा होती है.
हालांकि मात्रा में इसका हिस्सा कम होता है, लेकिन इसकी क्वालिटी और अधिक कीमत की वजह से यह चाय बागान मालिकों की कमाई का बड़ा जरिया है. दार्जिलिंग के चाय उत्पादकों की सालाना आय का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी प्रीमियम चाय से आता है.
दार्जिलिंग में नई चाय सीजन की शुरुआत मानी जाने वाली ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय की तुड़ाई आमतौर पर मार्च के मध्य से शुरू होती है और अप्रैल के अंत तक चलती है. इस बार मौसम अनुकूल रहने की वजह से चाय उत्पादकों को अच्छी फसल मिलने की उम्मीद है.
कुर्सियोंग घाटी में स्थित गिद्दापहाड़ चाय बागान के मालिक हिमांशु कुमार शॉ ने बताया कि इस साल लगभग सभी चाय बागानों में अच्छी बारिश हुई, जिससे फसल की स्थिति काफी बेहतर रही. उन्होंने कहा कि ज्यादातर उत्पादकों ने उत्पादन में बढ़ोतरी देखी है और इस बार पहली फसल का कुल उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
दार्जिलिंग की चाय की अच्छी पैदावार और उसकी क्वालिटी काफी हद तक बारिश और मौसम पर निर्भर करती है. खासकर साल की पहली फसल यानी ‘फर्स्ट फ्लश’ चाय के लिए अच्छा मौसम बहुत जरूरी होता है, क्योंकि यही चाय सबसे खास मानी जाती है और बाजार में सबसे ज्यादा कीमत पर बिकती है.
पिछले कुछ सालों में खराब मौसम और कम बारिश की वजह से दार्जिलिंग चाय का उत्पादन लगातार घटा है. साल 2024 में चाय उत्पादन 6 लाख किलोग्राम से नीचे आ गया था और केवल 5.60 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ. वहीं, पिछले साल यह और घटकर 5.30 लाख किलोग्राम रह गया, जो हाल के वर्षों का सबसे कम उत्पादन माना जा रहा है.
दार्जिलिंग चाय की विदेशों में भी काफी मांग है. हर साल करीब 3 से 3.25 लाख किलोग्राम चाय विदेश भेजी जाती है. यूरोप और जापान इसके बड़े खरीदार हैं. खास बात यह है कि दार्जिलिंग चाय भारत का पहला ऐसा उत्पाद है, जिसे जीआई (Geographical Indication) टैग मिला था, यानी इसकी पहचान और क्वालिटी को विशेष मान्यता प्राप्त है.
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