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राजस्थान के किसानों को गेहूं खरीद पर 125 रुपये बोनस मिलेगा, क्या ये किसान आंदोलन का असर है?

राजस्थान के किसानों को गेहूं खरीद पर 125 रुपये बोनस मिलेगा, क्या ये किसान आंदोलन का असर है?

राजस्थान सरकार ने किसानों को गेहूं खरीद पर एमएसपी के अलावा बोनस देने की तैयारी की है. राजस्थान सरकार को मुफ्त राशन योजना के तहत राज्य के लाभार्थियों को वितरण करना है और इसके लिए भी सरकार को गेहूं खरीद करनी है.

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राजस्थान सरकार को 27 लाख टन गेहूं की जरूरत. राजस्थान सरकार को 27 लाख टन गेहूं की जरूरत.

राजस्थान सरकार ने किसानों को गेहूं खरीद पर एमएसपी के अलावा बोनस देने की तैयारी की है. इसे किसानों के दिल्लो चलो मार्च से जोड़कर देखा जा रहा है. क्योंकि, बीते दिन केंद्र सरकार ने एमएसपी दरों पर गेहूं खरीद समय से पहले करने को कहा है. हालांकि, राजस्थान सरकार को मुफ्त राशन योजना के तहत राज्य के लाभार्थियों को वितरण करना है और इसके लिए भी सरकार गेहूं खरीद की तैयारी कर रही है. जबकि, चुनाव वादों में किसानों को गेहूं खरीद पर बोनस देने का ऐलान किया गया था. 

राजस्थान सरकार को 27 लाख टन गेहूं की जरूरत 

राजस्थान गेहूं खरीद के लिए किसानों को 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की पेशकश करेगा. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की ओर से 2,275 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी के ऊपर गेहूं की खरीद पर 125 रुपये प्रति क्विंटल के बोनस की घोषणा के बाद केंद्र सरकार को राजस्थान में कोई समस्या नहीं दिख रही है. क्योंकि, इस गेहूं की  खरीद सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए वास्तविक आवश्यकता से कम होने की संभावना है. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राजस्थान सरकार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत लाभार्थियों के बीच वितरित करने के लिए सालाना 27 लाख टन गेहूं की जरूरत है, राज्य सरकार खरीद योजना के तहत लगभग 20 लाख टन गेहूं खरीदने की तैयारी कर रही है. 

राज्यों पर बोनस घोषित करने का प्रतिबंध था 

केंद्र सरकार ने 2014 में एक आदेश जारी कर राज्यों को उस एमएसपी के ऊपर बोनस की घोषणा करने से रोक दिया था जिस पर उसने किसानों से गेहूं और धान खरीदा था. हालांकि, इसमें शर्त थी कि यदि कोई राज्य बोनस की घोषणा करता है तो केंद्र की खरीद एक वर्ष के लिए राज्य की वास्तविक आवश्यकता तक सीमित होगी. केंद्र ने कम उत्पादन और फसल क्षति के कारण 2022-23 में राजस्थान से केवल 0.1 लाख टन गेहूं खरीदा था, जिसे 2023-24 में बढ़ाकर 4.38 लाख टन कर दिया. इसी तरह 2021-22 में केंद्र सरकार ने राजस्थान से रिकॉर्ड 23.4 लाख टन गेहूं खरीदा था. देश भर में केंद्र सरकार की ओर से लक्ष्य से कम खरीद के कारण पिछले दो वर्षों में गेहूं की खुले बाजार में कीमतें ऊंची रहीं. हालांकि, 

व्यापारियों को ओएमएस के तहत गेहूं मिलते रहने की उम्मीद 

बोनस की घोषणा के बाद निजी व्यापारियों और मिल मालिकों ने उम्मीद जताते हुए कहा कि सरकार खुले बाजार में बिक्री योजना के तहत गेहूं देना जारी रखेगी. क्योंकि, बोनस देने के किसान सरकारी को गेहूं की बिक्री करेगा. यदि अन्य राज्यों में खुले बाजार की दरें एमएसपी के आसपास होती हैं तो उनके लिए सरकारी दर से मेल खाने की सहूलियत होगी. ट्रेडर्स ने कहा कि हम यह देखने के लिए इंतजार करेंगे कि इस साल बाजार दरें कैसी रहेंगी. इस साल अच्छी फसल की उम्मीद है जिससे कीमतें नीचे ही रहने का अनुमान है. लेकिन, अगर उपज में गिरावट होती है तो गेहूं की कीमत 2,400 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर भी जा सकती हैं. सरकारी खरीद बंद होने पर बाजार मूल्य सामान्य स्तर पर आने की संभावना जताई जा रही है और व्यापारी उस समय फैसला करेंगे.

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