महाराष्ट्र से मॉरीशस निर्यात होगा प्याजमहाराष्ट्र से प्याज का एक्सपोर्ट बढ़ने वाला है. नासिक और अहमदनगर जिलों से एक लाख टन से ज्यादा प्याज मॉरीशस भेजे जाने की उम्मीद है. राज्य के मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल ने मंगलवार को यह जानकारी दी. रावल ने कहा कि इस फैसले से निर्यात के लिए नए देशों की पहचान होगी क्योंकि पारंपरिक बाजारों में बढ़ते मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है. श्रीलंका और बांग्लादेश कभी भारतीय प्याज के बड़े बाजार थे. लेकिन हाल के वर्षों में इन देशों ने अपना घरेलू प्रोडक्शन बढ़ा दिया है, जिससे दुनिया के प्याज व्यापार में कॉम्पिटिशन बढ़ गया है. इसे देखते हुए सरकार निर्यात के नए-नए अवसर तलाश रही है. इसी अवसर में मॉरीशस भी शामिल है.
हालांकि महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से किसान खुश नहीं हैं और वे इसे महज 'जुमलेबाजी' बता रहे हैं. किसानों का कहना है कि जब सबकुछ बिगड़ा हुआ है, तब सरकार अपना चेहरा बचाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है. सटाणा के प्याज किसान नितिन वाघ ने कहा, मॉरीशस की आबादी इतनी नहीं है कि वह भारत के प्याज एक्सपोर्ट को फायदा पहुंचा सके. नासिक के दो तालुका के बराबर मॉरीशस की जनसंख्या है. ऐसे में वे हमारा प्याज कितना खरीदेंगे और कितना खाएंगे? 1 लाख टन प्याज निर्यात से कुछ नहीं होने वाला है. नितिन ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला किसानों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है.
नितिन की शिकायत है कि केंद्र की एक्सपोर्ट पॉलिसी ने प्याज की खेती और किसानों की परेशानी बढ़ाई है. पहले अरब के देशों में सबसे अधिक प्याज जाता था. लेकिन निर्यात बंदी ने सबकुछ तबाह कर दिया. हालत ये है कि नासिक में प्याज का भाव 800-1000 रुपये क्विंटल है जबकि एवरेज रेट 800-900 रुपये है और लागत 1000 रुपये से कभी कम नहीं रहती. नितिन ने कहा कि मॉरीशस प्याज भेजने से दाम थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन बहुत फायदा नहीं होगा.
नासिक का सटाणा क्षेत्र प्याज का सबसे बड़ा बेल्ट है जहां 70 फीसद से अधिक प्याज की खेती होती है. पहले यहां अनार अधिक होता था, मगर जब से उसकी लागत बढ़ी और दाम गिरे, तब से किसान प्याज की ओर शिफ्ट हो गए. अब प्याज ने भी निराश कर दिया है. प्याज के अलावा मक्के की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है. उसमें भी इथेनॉल का उत्पादन कम हो गया. तब से मक्का किसान भी परेशानी झेल रहे हैं.
सटाणा के एक और किसान भालचंद्र सोनवने ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, सरकार को प्याज की खेती से कोई लेना-देना नहीं. मॉरीशस में प्याज निर्यात से किसान को कोई फायदा नहीं होगा. सोनवने ने बताया कि अभी रबी प्याज की कटाई चल रही है. इस प्याज को अधिक दिनों तक स्टोर नहीं कर सकते क्योंकि इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है. किसान को यह प्याज काटकर जल्दी में बेचना होता है. किसान को तभी फायदा होगा जब मार्केट में सही रेट हो. लेकिन प्याज को कई तरह की मार झेलनी पड़ रही है. खाड़ी युद्ध ने निर्यात ठप कर दिया है. कुछ कंटेनर निकले भी थे, वे जहां-तहां फंस गए हैं.
सोनवने ने महाराष्ट्र में प्याज की बिगड़ी हालत के लिए सरकार की एक्सपोर्ट पॉलिसी को दोषी ठहराया. उन्होंने कहा, जब तक बांग्लादेश और श्रीलंका प्याज खरीद रहे थे, सबकुछ ठीक था. बाद में सरकार ने एक्सपोर्ट पॉलिसी में हां-ना वाली स्थिति खड़ी कर दी, तब से मामला बिगड़ गया. एक्सपोर्ट में हां-ना नहीं चलता क्योंकि खरीदार देश को गारंटी चाहिए. भारत सरकार की निर्यात बंदी से कई देशों में प्याज खरीद की गारंटी पर प्रश्नचिह्न लग गया. इससे निर्यात की पूरी चेन तबाह हो गई. रही-सही कसर खाड़ी युद्ध ने पूरी कर दी. इस साल नुकसान अधिक है क्योंकि बड़ी तादाद में किसानों ने प्याज की खेती की थी. लेकिन रेट 1000 रुपये भी नहीं मिल रहे हैं. सोनवने की तरह बाकी किसानों की भी यही राय है. उनका कहना है कि महाराष्ट्र में प्याज किसानों की हालत कब सुधरेगी, यह कहना मुश्किल है.
महाराष्ट्र भारत के प्याज एक्सपोर्ट में सबसे आगे है, जो देश के कुल निर्यात का लगभग 80 परसेंट हिस्सा देता है. राज्य के अंदर, नासिक जिला महाराष्ट्र के प्याज एक्सपोर्ट में लगभग 70-80 परसेंट का योगदान देता है. नासिक में लासलगांव एशिया का सबसे बड़ा प्याज बाजार है. यहां कई राज्यों के किसान अपनी उपज लेकर आते हैं क्योंकि व्यापार के अलावा निर्यात बड़े पैमाने पर होता है. सरकार ने निर्यात के लिए मॉरीशस को भले चुना है, लेकिन इस फैसले से किसानों में कोई खुशी नहीं है.
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